थॉर्नडाइक के अधिगम के नियम
थॉर्नडाइक के सीखने के मुख्य नियम
- एडवर्ड एल. थॉर्नडाइक ने अपने प्रयोगों (विशेष रूप से बिल्ली और पहेली बॉक्स प्रयोग) के आधार पर अधिगम
के तीन मुख्य नियम प्रतिपादित किए, जो व्यवहारवादी सिद्धान्त का आधार हैं।
- 1. प्रभाव का नियम (Law of Effect):
- यदि किसी व्यवहार के परिणाम संतोषजनक या सकारात्मक होते हैं, तो वह व्यवहार दोहराए जाने की
संभावना बढ़ जाती है।
- यदि परिणाम असंतोषजनक या नकारात्मक होते हैं, तो व्यवहार दोहराए जाने की संभावना कम हो जाती है।
- उदाहरण: यदि बच्चा सही उत्तर देने पर प्रशंसा प्राप्त करता है, तो वह भविष्य में भी सही उत्तर
देने का प्रयास करेगा।
- 2. अभ्यास का नियम (Law of Exercise):
- बार-बार अभ्यास करने से उद्दीपन और प्रतिक्रिया के बीच का संबंध मजबूत होता है।
- इसमें दो उप-नियम शामिल हैं:
- उपयोग का नियम (Law of Use): बार-बार उपयोग से व्यवहार मजबूत होता है।
- अनुपयोग का नियम (Law of Disuse): उपयोग न करने से व्यवहार कमजोर हो जाता है।
- उदाहरण: नियमित गणित अभ्यास से गणना कौशल मजबूत होता है।
- 3. तत्परता का नियम (Law of Readiness):
- यदि सीखने वाला सीखने के लिए तैयार और प्रेरित है, तो अधिगम अधिक प्रभावी और संतोषजनक होता है।
- यदि सीखने वाला तैयार नहीं है, तो अधिगम कठिन और असंतोषजनक हो सकता है।
- उदाहरण: यदि बच्चा पढ़ने में रुचि रखता है, तो वह तेजी से सीखेगा।
- नोट: थॉर्नडाइक का सिद्धान्त उद्दीपन-प्रतिक्रिया (S-R) सिद्धान्त पर आधारित है, जो
व्यवहारवाद का मूल है।
अधिगम में थॉर्नडाइक के नियमों का महत्व
- शिक्षण प्रक्रिया में प्रेरणा: प्रभाव और तत्परता के नियम शिक्षकों को प्रेरणादायक और सकारात्मक
शिक्षण वातावरण बनाने में मदद करते हैं।
- अभ्यास और पुनरावृत्ति: अभ्यास का नियम शिक्षण में नियमित अभ्यास और पुनरावृत्ति के महत्व को
रेखांकित करता है, जो कौशल विकास में सहायक है।
- पुरस्कार और दंड: प्रभाव का नियम पुरस्कार (जैसे प्रशंसा, अंक) और दंड (जैसे सुधारात्मक
प्रतिक्रिया) के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
- व्यक्तिगत भिन्नताओं का ध्यान: तत्परता का नियम शिक्षकों को प्रत्येक बच्चे की रुचि और तत्परता
के स्तर के अनुसार शिक्षण रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
- कक्षा प्रबंधन: इन नियमों का उपयोग कक्षा में अनुशासन और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने में
किया जाता है।
- "थॉर्नडाइक के नियम शिक्षण को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने का आधार प्रदान करते हैं।" –
स्किनर
- नोट: ये नियम समावेशी शिक्षा में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए भी उपयोगी हैं।
अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक
- प्रेरणा (Motivation): आंतरिक और बाह्य प्रेरणा अधिगम को प्रोत्साहित करती है। मास्लो के
आवश्यकता क्रम के अनुसार, बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी होने पर सीखना प्रभावी होता है।
- वंशानुक्रम (Heredity): जन्मजात बुद्धि और क्षमताएँ अधिगम की गति को प्रभावित करती हैं।
- वातावरण (Environment): पारिवारिक, सामाजिक, और विद्यालयीय वातावरण सीखने की प्रक्रिया को
प्रभावित करता है।
- स्वास्थ्य और पोषण: अच्छा स्वास्थ्य और उचित पोषण संज्ञानात्मक विकास के लिए आवश्यक हैं।
- शिक्षक की भूमिका: शिक्षक का व्यवहार और शिक्षण शैली अधिगम की प्रभावशीलता को बढ़ाती है।
- रुचि और दृष्टिकोण: छात्र की रुचि और सकारात्मक दृष्टिकोण अधिगम को प्रोत्साहित करते हैं।
प्रभावशाली शिक्षण विधियाँ (थॉर्नडाइक के नियमों के संदर्भ में)
- आगमन विधि:
- जनक: अरस्तू
- प्रत्यक्ष अनुभवों से सामान्य नियमों की ओर।
- थॉर्नडाइक के नियमों का उपयोग: अभ्यास और सकारात्मक परिणामों (प्रभाव का नियम) के माध्यम से
सीखना।
- प्रोजेक्ट विधि:
- जनक: जॉन ड्यूई, विलियम किलपैट्रिक
- परियोजनाओं के माध्यम से व्यावहारिक अधिगम।
- थॉर्नडाइक के नियमों का उपयोग: तत्परता और प्रभाव के नियम से रचनात्मकता और प्रेरणा बढ़ती है।
- समस्या समाधान विधि:
- छात्र तार्किक और विश्लेषणात्मक रूप से समस्याओं का समाधान करते हैं।
- थॉर्नडाइक के नियमों का उपयोग: सकारात्मक परिणाम (प्रभाव का नियम) और अभ्यास से कौशल विकास।
- खोज विधि:
- प्रवर्तक: जेरोम ब्रूनर
- छात्र स्वयं अन्वेषण के माध्यम से सीखते हैं।
- थॉर्नडाइक के नियमों का उपयोग: तत्परता का नियम जिज्ञासा को प्रोत्साहित करता है।
- सहयोगात्मक अधिगम विधि:
- छात्र समूहों में सहयोग करके सीखते हैं।
- थॉर्नडाइक के नियमों का उपयोग: सकारात्मक सामाजिक अनुभव (प्रभाव का नियम) सहयोग को बढ़ाते हैं।
यूपी टीईटी और सीटीईटी के लिए अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: समग्र और अनुभव-आधारित अधिगम पर जोर, 5+3+3+4 ढांचा।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009: 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा।
- निरंतर और समग्र मूल्यांकन (CCE): शैक्षिक और सह-शैक्षिक गतिविधियों का समग्र मूल्यांकन।
- पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त: संज्ञानात्मक विकास के चार चरण (संवेदी-प्रेरक,
पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक, औपचारिक संक्रियात्मक)।
- एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धान्त: सामाजिक और संवेगात्मक विकास के आठ चरण।
- स्किनर का संनादी अधिगम: सकारात्मक और नकारात्मक सुदृढीकरण के माध्यम से व्यवहार संशोधन।
- बान्दुरा का सामाजिक अधिगम सिद्धान्त: अवलोकन और अनुकरण के माध्यम से सीखना।
- वायगोत्स्की का समीपस्थ विकास क्षेत्र: शिक्षक और सहपाठी की सहायता से अधिगम।
- NCERT की भूमिका: पाठ्यक्रम और शिक्षण सामग्री का विकास।
- शिक्षक की भूमिका: अधिगम में मार्गदर्शक, सुगमकर्ता, और प्रेरक।
- समावेशी शिक्षा: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा में शामिल करना।