शिक्षा और मनोविज्ञान
वृद्धि एवं विकास के मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त
- फ्रॉयड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त: सिगमंड फ्रॉयड ने व्यक्तित्व विकास को पाँच मनोलैंगिक
चरणों (मुख, गुदा, लैंगिक, अव्यक्त, जनन) में वर्णित किया, जो अचेतन प्रेरणाओं और इच्छाओं पर आधारित
हैं।
- पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त: जीन पियाजे ने चार चरणों (संवेदी-प्रेरक,
पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त संक्रियात्मक, औपचारिक संक्रियात्मक) में बच्चों के संज्ञानात्मक विकास का
वर्णन किया।
- एरिक्सन का मनोसामाजिक विकास सिद्धान्त: एरिक एरिक्सन ने आठ मनोसामाजिक चरणों (जैसे विश्वास बनाम
अविश्वास, पहल बनाम अपराधबोध) में सामाजिक और भावनात्मक विकास पर जोर दिया।
- चॉम्स्की का भाषा विकास सिद्धान्त: नोम चॉम्स्की ने भाषा अधिग्रहण यंत्र (LAD) की अवधारणा दी, जो
बच्चों की जन्मजात भाषा सीखने की क्षमता को दर्शाता है।
- कोलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धान्त: लॉरेंस कोलबर्ग ने नैतिक विकास के छह चरणों को तीन स्तरों
(पूर्व-परंपरागत, परंपरागत, परंपरागतोत्तर) में वर्गीकृत किया।
मनोविज्ञान के सम्प्रदाय
- संरचनावाद: मुख्य प्रकरण - संवेदना; प्रवर्तक - वुंट, टिचनेर। चेतना के तत्वों का विश्लेषण।
- प्रकार्यवाद: मुख्य प्रकरण - व्यवहार (अधिगम); प्रवर्तक - एंजल, ड्यूई। मन की कार्यप्रणाली पर
ध्यान।
- व्यवहारवाद: मुख्य प्रकरण - व्यवहार (पशु व्यवहार); प्रवर्तक - पावलोव, वाटसन।
उद्दीपन-प्रतिक्रिया पर जोर।
- समग्रवाद: मुख्य प्रकरण - प्रत्यक्षीकरण, स्मरण, अंतर्दृष्टि; प्रवर्तक - वर्दीमर, कोहलर,
कोफ्का। समग्र अनुभव पर बल।
- मनोविश्लेषणवाद: मुख्य प्रकरण - अचेतनावस्था; प्रवर्तक - फ्रॉयड, एडलर, जुंग। अचेतन मन की
भूमिका।
व्यक्तित्व के सिद्धान्त
- मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त: प्रतिपादक - सिगमंड फ्रॉयड। इद, अहं और पराहम पर आधारित।
- शरीर रचना सिद्धान्त: प्रतिपादक - शेल्डन। शरीर संरचना (एंडोमॉर्फ, मेसोमॉर्फ, एक्टोमॉर्फ) और
व्यक्तित्व का संबंध।
- शील गुण सिद्धान्त: प्रतिपादक - ऑलपोर्ट, कैटेल। व्यक्तित्व को गुणों के आधार पर समझना।
- प्रेरणात्मक सिद्धान्त: प्रतिपादक - मास्लो। आवश्यकताओं का क्रम (शारीरिक, सुरक्षा, सामाजिक,
सम्मान, आत्मबोध)।
- परिस्थितिवाद: प्रतिपादक - गार्डनर मर्फी। पर्यावरण और परिस्थितियों का व्यक्तित्व पर प्रभाव।
- आस्तित्ववादी सिद्धान्त: प्रतिपादक - कार्ल रोजर्स। आत्म-अवधारणा और स्व-विकास पर जोर।
- व्यवहारवादी सिद्धान्त: प्रतिपादक - बी. एफ. स्किनर। व्यवहार अधिगम और प्रबलन (reinforcement) पर
आधारित।
- संज्ञानात्मक सिद्धान्त: प्रतिपादक - जॉर्ज केली। व्यक्तित्व को व्यक्तिगत संरचनाओं (personal
constructs) के माध्यम से समझाना।
- सामाजिक अधिगम सिद्धान्त: प्रतिपादक - अल्बर्ट बंडूरा। अवलोकन (modeling) और अनुकरण के माध्यम से
व्यक्तित्व का विकास।
- हिप्पोक्रेटस का शारीरिक द्रव सिद्धान्त: व्यक्तित्व को चार रसों (रक्त, पित्त, श्लेष्मा, कफ) पर
आधारित माना गया।
- आइज़ेंक का आयामी सिद्धान्त: प्रतिपादक - हांस आइज़ेंक। व्यक्तित्व के तीन आयाम – बहिर्मुखता,
अंतर्मुखता और न्यूरोटिसिज़्म।
- युंग का विश्लेषणात्मक सिद्धान्त: प्रतिपादक - कार्ल जुंग। अंतर्मुखी और बहिर्मुखी प्रवृत्ति तथा
सामूहिक अचेतन की अवधारणा।
- बिग फाइव मॉडल: आधुनिक दृष्टिकोण। पाँच आयाम – OCEAN (Openness, Conscientiousness,
Extraversion, Agreeableness, Neuroticism)।
व्यक्तित्व परीक्षण
- TAT (Thematic Apperception Test): प्रतिपादक - मॉर्गन और मरे। अचेतन प्रेरणाओं का अध्ययन।
- रोर्शाक स्याही धब्बा परीक्षण: प्रतिपादक - हरमन रोर्शाक। व्यक्तित्व लक्षणों का विश्लेषण।
- CAT (Children’s Apperception Test): प्रतिपादक - लियोपोल्ड बेलक। बच्चों के लिए अचेतन प्रेरणा
परीक्षण।
- क्लास आउट परीक्षा: प्रतिपादक - प्रेसी और मॉर्गन। व्यक्तित्व मूल्यांकन।
- मोजेक परीक्षण: प्रतिपादक - मार्गरेट लोवेनफेल्ड। रचनात्मकता और संज्ञानात्मक प्रक्रिया का
अध्ययन।
- MMPI (Minnesota Multiphasic Personality Inventory): प्रतिपादक - हैथवे और मैकिन्ले। नैदानिक
व्यक्तित्व और मनोवैज्ञानिक विकारों का मूल्यांकन।
- 16 PF (Sixteen Personality Factor Questionnaire): प्रतिपादक - रेमंड कैटेल। व्यक्तित्व के 16
आयामों का अध्ययन।
- NEO-PI-R (NEO Personality Inventory): प्रतिपादक - कोस्टा और मैक्रे। बिग फाइव (OCEAN मॉडल) पर
आधारित व्यक्तित्व मूल्यांकन।
- EPQ (Eysenck Personality Questionnaire): प्रतिपादक - हांस आइज़ेंक। बहिर्मुखता, अंतर्मुखता और
न्यूरोटिसिज़्म का मापन।
- MBTI (Myers-Briggs Type Indicator): प्रतिपादक - इसाबेल मायर्स और कैथरीन ब्रिग्स। व्यक्तित्व
के 16 प्रकारों का आकलन।
- Sentence Completion Test: अधूरी वाक्यों को पूरा करके अचेतन विचारों और दृष्टिकोणों का
मूल्यांकन।
- Draw-a-Person Test: बच्चे या व्यक्ति द्वारा चित्रण के आधार पर भावनात्मक और संज्ञानात्मक गुणों
का अध्ययन।
- Word Association Test: कार्ल जुंग द्वारा प्रयुक्त। शब्दों पर त्वरित प्रतिक्रिया से अचेतन
प्रक्रियाओं का विश्लेषण।
बुद्धि और बुद्धि परीक्षण
- केली ने अपनी पुस्तक Crossroads in the Mind of Man में बुद्धि को खण्डों या योग्यताओं का समूह
बताया।
- थर्स्टन ने अपनी पुस्तक Primary Mental Abilities में बुद्धि को सात प्राथमिक योग्यताओं (संख्या,
तर्क, शब्द प्रवाह, स्थानिक, स्मृति, प्रत्यक्षीकरण, समझ) का समूह माना।
- 1879 में विलियम वुंट ने जर्मनी के लीपजिग में प्रथम मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला स्थापित कर बुद्धि मापन को
वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।
- मानसिक आयु की अवधारणा का श्रेय बिने को है।
- टर्मन ने बुद्धि लब्धि (Intelligence Quotient) की अवधारणा दी।
- बुद्धि लब्धि (IQ) = मानसिक आयु ÷ वास्तविक आयु × 100
- उदाहरण: यदि बालक की मानसिक आयु 10 वर्ष और वास्तविक आयु 8 वर्ष है, तो IQ = (10 ÷ 8) × 100 =
125
- बुद्धि के प्रकार:
- 140+: प्रतिभाशाली बुद्धि
- 90-110: सामान्य बुद्धि
- 80-90: मंद बुद्धि
- 70 से कम: महामूर्ख
- वैयक्तिक बुद्धि परीक्षा का पहला सफल प्रयास एल्फ्रेड बिने ने किया।
- बिने-साइमन बुद्धि परीक्षा 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए थी, जिसमें 1911 में 54 प्रश्न थे।
- स्टैनफोर्ड-बिने स्केल को 1916 में टर्मन ने विकसित किया, जो 14 वर्ष के बच्चों के लिए है।
- वैयक्तिक गैर-भाषात्मक परीक्षाएँ:
- पोर्टियस भूलभुलैया टेस्ट: 13-14 वर्ष के बच्चों के लिए, 8 वर्ष के बच्चों को 2 अवसर,
12-14 वर्ष के बच्चों को 4 अवसर।
- सामूहिक भाषात्मक परीक्षाएँ:
- आर्मी अल्फा टेस्ट: प्रथम विश्वयुद्ध में अमेरिका में प्रयोग।
- सामूहिक गैर-भाषात्मक परीक्षाएँ:
- आर्मी बीटा टेस्ट: गैर-भाषात्मक बुद्धि मापन।
- वेच्सलर-बेलव्यू टेस्ट: 1944 में 10-60 वर्ष की आयु के व्यक्तियों के लिए।
- सेना सामान्य वर्गीकरण टेस्ट: द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका में।
- शिकागो गैर-भाषात्मक टेस्ट: गैर-भाषात्मक बुद्धि मापन।
प्रमुख शिक्षण विधियाँ
- आगमन विधि:
- जनक: अरस्तू
- प्रत्यक्ष अनुभवों, उदाहरणों और प्रयोगों से नियम निकाले जाते हैं।
- शिक्षण सूत्र: प्रत्यक्ष से प्रमाण, स्थूल से सूक्ष्म, विशिष्ट से सामान्य की ओर।
- निगमन विधि:
- जनक: अरस्तू
- शिक्षण सूत्र: नियम से उदाहरण, सामान्य से विशिष्ट, सूक्ष्म से स्थूल, प्रमाण से प्रत्यक्ष की
ओर।
- प्रोजेक्ट विधि:
- जनक: जॉन ड्यूई, विलियम किलपैट्रिक
- छात्र परियोजनाओं के माध्यम से व्यावहारिक और अनुभव-आधारित अधिगम करते हैं।
- लाभ: रचनात्मकता, समस्या समाधान और स्वतंत्र चिंतन को बढ़ावा देता है।
- समस्या समाधान विधि:
- छात्रों को समस्याएँ दी जाती हैं, जिनका समाधान वे तार्किक और विश्लेषणात्मक रूप से करते हैं।
- लाभ: आलोचनात्मक चिंतन और निर्णय लेने की क्षमता का विकास।
- खोज विधि:
- प्रवर्तक: जेरोम ब्रूनर
- छात्र स्वयं अन्वेषण और खोज के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करते हैं।
- लाभ: जिज्ञासा और आत्म-निर्भरता को प्रोत्साहित करता है।
- सहयोगात्मक अधिगम विधि:
- छात्र समूहों में सहयोग करके सीखते हैं।
- लाभ: सामाजिक कौशल, सहयोग और संचार क्षमता का विकास।
- व्याख्यान विधि:
- अध्यापक मौखिक रूप से विषय प्रस्तुत करता है।
- लाभ: समय की बचत, अधिक छात्रों को एक साथ जानकारी देना।
- सीमाएँ: छात्रों की सक्रिय भागीदारी कम होती है।
- प्रदर्शन विधि:
- शिक्षक या छात्र प्रयोग, मॉडल, चार्ट आदि द्वारा प्रदर्शन करते हैं।
- लाभ: दृश्य और व्यावहारिक अनुभव मिलता है।
- अनुभव आधारित विधि:
- शिक्षण वास्तविक जीवन अनुभवों और गतिविधियों पर आधारित होता है।
- लाभ: सीखना अधिक स्थायी और अर्थपूर्ण बनता है।
- भूमिका निर्वाह विधि:
- छात्र विभिन्न भूमिकाएँ निभाकर स्थितियों को समझते हैं।
- लाभ: संवेदनशीलता, संचार और सहानुभूति का विकास।
- चर्चा विधि:
- छात्र और शिक्षक मिलकर किसी विषय पर विचार-विमर्श करते हैं।
- लाभ: आलोचनात्मक चिंतन, विचार अभिव्यक्ति और सक्रिय सहभागिता।
- ई-लर्निंग विधि:
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, डिजिटल सामग्री और मल्टीमीडिया का प्रयोग।
- लाभ: लचीला, इंटरैक्टिव और व्यक्तिगत गति से सीखना।
यूपी टीईटी और सीटीईटी के लिए अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य
- स्किनर का संनादी अधिगम सिद्धान्त (Operant Conditioning): व्यवहार को सकारात्मक और नकारात्मक
परिणामों के माध्यम से नियंत्रित करना।
- बान्दुरा का सामाजिक अधिगम सिद्धान्त (Social Learning Theory): अवलोकन, अनुकरण और मॉडलिंग के
माध्यम से सीखना।
- गैग्ने की अधिगम की शर्तें (Conditions of Learning): अधिगम के विभिन्न स्तर और शिक्षण
रणनीतियाँ।
- भावनात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence): डैनियल गोलमैन द्वारा दी गई अवधारणा, जो भावनाओं को
समझने और प्रबंधित करने की क्षमता पर केंद्रित है।
- मॉन्टेसरी विधि: मारिया मॉन्टेसरी द्वारा विकसित, जो बच्चों की स्वतंत्रता और आत्म-निर्देशित
अधिगम पर जोर देती है।
- व्यवहारवादी बनाम रचनावादी दृष्टिकोण: व्यवहारवादी (उद्दीपन-प्रतिक्रिया) और रचनावादी
(अनुभव-आधारित) शिक्षण में भेद।
- अधिगम के लिए मूल्यांकन (Assessment for Learning): शिक्षण प्रक्रिया में निरंतर और रचनात्मक
मूल्यांकन।
- NCERT की भूमिका: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) पाठ्यक्रम और शिक्षण
सामग्री विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- शिक्षक की भूमिका: बाल विकास में शिक्षक मार्गदर्शक, सुगमकर्ता और प्रेरक के रूप में कार्य करता
है।
- पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त: बच्चों का विकास चार चरणों में – संवेदी-गतिशील,
पूर्व-संक्रियात्मक, ठोस-संक्रियात्मक, औपचारिक-संक्रियात्मक।
- वायगोत्स्की का समीपस्थ विकास क्षेत्र (ZPD): सीखने में सहयोग और मार्गदर्शन की भूमिका।
- जॉन डेवी का प्रगतिशील शिक्षा सिद्धान्त: अनुभव-आधारित शिक्षा और लोकतांत्रिक कक्षा।
- कोलब का अनुभवात्मक अधिगम चक्र: ठोस अनुभव, चिंतनशील अवलोकन, अमूर्त संकल्पना और सक्रिय प्रयोग।
- ब्रूनर का खोजपरक अधिगम सिद्धान्त: छात्र स्वयं खोजकर सीखते हैं।
- ब्लूम की संज्ञानात्मक शिक्षा के 6 स्तर: ज्ञान, समझ, अनुप्रयोग, विश्लेषण, संश्लेषण, मूल्यांकन।
- कौशल आधारित शिक्षा: केवल ज्ञान नहीं बल्कि व्यावहारिक कौशल का विकास।
- बाल मानसशास्त्र: बच्चे की सोच, व्यवहार और विकास को समझने के लिए आवश्यक।
- शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM): सीखने को सरल और रोचक बनाने के साधन।
- सीबीएसई द्वारा CCE: निरंतर और समग्र मूल्यांकन पद्धति।
- स्वतंत्र शिक्षा आंदोलन: टेगोर और गांधी के विचारों पर आधारित।
- क्रिटिकल थिंकिंग: समस्या समाधान और तार्किक निर्णय क्षमता।
- बाल अधिकार: शिक्षा, सुरक्षा और विकास से जुड़े मूल अधिकार।
- शैक्षिक मनोविज्ञान: शिक्षा प्रक्रिया में मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का उपयोग।
- आइजैक न्यूटन: प्राकृतिक विज्ञान और शिक्षा के संबंध में प्रेरणा।
- ड्रिल विधि: अभ्यास और पुनरावृत्ति द्वारा अधिगम।
- समावेशी शिक्षा: सभी बच्चों को समान अवसर।
- ICT आधारित शिक्षा: डिजिटल उपकरणों का उपयोग।
- मूल्य शिक्षा: नैतिक और सामाजिक मूल्यों का विकास।
- राष्ट्रीय शैक्षिक नीति 1968: शिक्षा में समान अवसर और त्रिभाषा सूत्र।
- राष्ट्रीय शैक्षिक नीति 1986: शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और बालिका शिक्षा।
- NEP 2020: समग्र, बहुविषयक और कौशल आधारित शिक्षा।
- आत्म-निर्देशित अधिगम: छात्र अपने सीखने की जिम्मेदारी लेते हैं।
- शैक्षिक प्रौद्योगिकी: शिक्षा को प्रभावी बनाने हेतु तकनीक का प्रयोग।
- बाल विकास के कारक: आनुवंशिकता और पर्यावरण दोनों का प्रभाव।
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद: पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और मूल्यांकन में भूमिका।
- शिक्षा का लक्ष्य: समग्र विकास – शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक।
- शैक्षिक मनोवैज्ञानिक: पियाजे, फ्रॉयड, एरिक्सन, वायगोत्स्की।
- सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा: सभी बच्चों को प्राथमिक स्तर तक शिक्षा।
- अनुभवात्मक अधिगम: "करके सीखना" (Learning by Doing)।
- लोक शिक्षा: आम जनता के लिए शिक्षा का प्रसार।
- पाठ योजना: शिक्षक के लिए शिक्षण का रोडमैप।
- गांधीजी की बुनियादी शिक्षा: कार्य-आधारित शिक्षा पर बल।
- टैगोर की शिक्षा: प्राकृतिक और सौंदर्यपरक शिक्षा।
- फ्रोबेल का किंडरगार्टन: खेल और गतिविधियों के माध्यम से शिक्षा।
- समूह अधिगम: सहयोग और सहपाठी अधिगम।
- प्रेरणा: सीखने की आंतरिक शक्ति।
- मूल्यांकन के प्रकार: प्रारंभिक, निर्माणात्मक और संपूर्ण मूल्यांकन।
- शिक्षक-छात्र संबंध: अधिगम की सफलता के लिए आवश्यक।
- समकालीन शिक्षा: वैश्वीकरण और डिजिटलीकरण पर आधारित।
- बहुभाषिक शिक्षा: बच्चों की मातृभाषा में शिक्षा प्रारंभ करना।
- शैक्षिक दर्शन: यथार्थवाद, आदर्शवाद, प्राकृतिकवाद और प्रयोगवाद।
- आजीवन अधिगम: शिक्षा जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है।
- बाल श्रम और शिक्षा: शिक्षा को बाल श्रम से मुक्त करना।
- शिक्षा और समाज: शिक्षा समाज सुधार का प्रमुख साधन।
- सीखने में बाधाएँ: शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कारक।
- अधिगम शैली: दृश्य, श्रवण और स्पर्श आधारित सीखना।
- 21वीं सदी के कौशल: आलोचनात्मक सोच, सहयोग, संचार और रचनात्मकता।
- शिक्षण विधियाँ: व्याख्यान, प्रदर्शन, परियोजना और समस्या समाधान।
- कक्षा प्रबंधन: अनुशासन और सकारात्मक वातावरण।
- समावेशन: सभी बच्चों के लिए समान अवसर।