अधिगम का मानवतावादी सिद्धांत

Abraham Harold Maslow

अब्राहम मास्लो

अब्राहम हैरॉल्ड मास्लो (Abraham Harold Maslow)

प्रतिपादक

प्रतिपादक: अब्राहम हैरॉल्ड मास्लो (Abraham Harold Maslow)

जन्म – मृत्यु: 1 अप्रैल 1908 – 8 जून 1970

देश: संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America)

क्षेत्र: मानवतावादी मनोविज्ञान (Humanistic Psychology)

सिद्धांत का प्रतिपादन वर्ष: 1943 ई.

प्रमुख लेख: “A Theory of Human Motivation” (1943)

प्रमुख ग्रंथ:

  • Motivation and Personality (1954)
  • Toward a Psychology of Being (1962)

प्रमुख समर्थक: कार्ल रोजर्स

उपनाम: आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of Needs Theory)

मास्लो का संक्षिप्त परिचय

अब्राहम मास्लो मानवतावादी मनोविज्ञान के प्रमुख प्रवर्तकों में से एक थे। उन्होंने मनुष्य को केवल उत्तेजना-प्रतिक्रिया का यंत्र नहीं माना, बल्कि एक स्वतंत्र, रचनात्मक एवं विकासशील प्राणी के रूप में देखा। मास्लो का मानना था कि मनुष्य सदैव उच्चतर आवश्यकताओं की पूर्ति की ओर अग्रसर रहता है।

मास्लो की आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत की संरचना

मास्लो ने मानव आवश्यकताओं को पदानुक्रम (क्रमबद्ध सीढ़ी) के रूप में प्रस्तुत किया। निम्न स्तर की आवश्यकता पूर्ण होने पर ही व्यक्ति उच्च स्तर की आवश्यकता की ओर बढ़ता है।

पदानुक्रम स्तर

मास्लो का आवश्यकता पदानुक्रम पिरामिड

1. प्राथमिक आवश्यकताएँ (Basic / Deficiency Needs)

  1. (i) शारीरिक आवश्यकताएँ
    भोजन, जल, नींद, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य।
    👉 शिक्षा में: भूखा या बीमार बच्चा प्रभावी ढंग से नहीं सीख सकता।
  2. (ii) सुरक्षा की आवश्यकता
    शारीरिक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता, भय-मुक्त वातावरण।
    👉 विद्यालय में सुरक्षित, अनुशासित एवं सहयोगी वातावरण आवश्यक।
  3. (iii) सामाजिक आवश्यकताएँ
    प्रेम, स्नेह, मित्रता, समूह में स्वीकार्यता।
    👉 शिक्षक-विद्यार्थी संबंध जितना मधुर होगा, अधिगम उतना प्रभावी होगा।

2. गौण / विकासात्मक आवश्यकताएँ (Growth Needs)

  1. (iv) आत्मसम्मान की आवश्यकता
    स्व-सम्मान, आत्म-विश्वास, सफलता की मान्यता, प्रशंसा।
    👉 पुरस्कार, सराहना और प्रोत्साहन विद्यार्थियों की सीखने की इच्छा बढ़ाते हैं।
  2. (v) आत्म-वास्तवीकरण (Self-Actualization)
    व्यक्ति की पूर्ण क्षमताओं का विकास, रचनात्मकता, नैतिकता, स्वतंत्र सोच।
    👉 यही मानव जीवन एवं शिक्षा का सर्वोच्च लक्ष्य है।

मास्लो के अनुसार आत्म-वास्तविक व्यक्ति की विशेषताएँ

  • यथार्थ को सही रूप में देखना
  • रचनात्मक एवं मौलिक सोच
  • आत्म-स्वीकृति
  • समस्या-केन्द्रित दृष्टिकोण
  • मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता

सिद्धांत का शैक्षिक आधार

अधिगम तभी प्रभावी होता है जब निम्न स्तर की आवश्यकताएँ संतुष्ट हों।

प्रेरणा आंतरिक होती है, बाहरी दंड-पुरस्कार गौण हैं।

शिक्षा का उद्देश्य पूर्ण विकसित व्यक्तित्व का निर्माण है।

शिक्षक का कार्य अनुकूल वातावरण प्रदान करना है।

कार्ल रोजर्स द्वारा सिद्धांत का विस्तार

बाल-केंद्रित शिक्षा

अनुभव आधारित अधिगम

स्व-निर्देशित अधिगम

शिक्षक सहायक एवं मार्गदर्शक

शैक्षिक महत्व

विद्यार्थियों की भावनात्मक आवश्यकताओं की पहचान

डर-मुक्त एवं सहयोगात्मक कक्षा वातावरण

रचनात्मकता एवं आत्म-अभिव्यक्ति को बढ़ावा

मूल्यपरक एवं जीवनोपयोगी शिक्षा

सीमाएँ / आलोचनाएँ

सभी व्यक्ति आवश्यकताओं को एक ही क्रम में अनुभव नहीं करते

आत्म-वास्तवीकरण मापना कठिन

सांस्कृतिक भिन्नताओं की उपेक्षा

परीक्षा-उपयोगी तथ्य (One-Liners)

मास्लो का सिद्धांत 1943 ई. में दिया गया

यह मानवतावादी मनोविज्ञान पर आधारित है

आत्म-वास्तवीकरण सर्वोच्च आवश्यकता है

यह सिद्धांत आंतरिक प्रेरणा पर बल देता है

शिक्षक की भूमिका सहायक होती है