अधिगम का क्षेत्र सिद्धांत (Field Theory of Learning)

Kurt Lewin

कर्ट लेविन

कर्ट लेविन (Kurt Lewin, 1890–1947)

प्रतिपादक

कर्ट लेविन (Kurt Lewin, 1890–1947) एक जर्मन-अमेरिकी मनोवैज्ञानिक, जिन्हें “Social Psychology का जनक” भी कहा जाता है।

उपनाम

  • फेज थ्योरी (Phase Theory)
  • प्राकृतिक दशा का सिद्धांत (Natural State Theory)
  • क्षेत्र सिद्धांत (Field Theory)

सूत्र का विवरण

B = F(P, E)

Behavior (व्यवहार) = किसी भी समय व्यक्ति की क्रिया, प्रतिक्रिया या आचरण।

Function (फलन) = "निर्भर होना" या “परिणामस्वरूप होना”।

P (Person) = व्यक्ति की व्यक्तिगत विशेषताएँ जैसे व्यक्तित्व, भावनाएँ, इच्छाएँ, आवश्यकताएँ, पूर्व अनुभव, बुद्धि स्तर।

E (Environment) = व्यक्ति के चारों ओर का मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वातावरण – जैसे परिवार, कक्षा का माहौल, सामाजिक परिस्थितियाँ, सांस्कृतिक मूल्य, आर्थिक स्थिति।

सरल अर्थ

किसी भी व्यक्ति का व्यवहार (B) = उसके व्यक्तिगत कारक (P) और पर्यावरणीय कारक (E) के संयुक्त प्रभाव का परिणाम।

यानी, न तो केवल व्यक्ति जिम्मेदार है और न केवल वातावरण, बल्कि दोनों का आपसी अंतःक्रिया (Interaction) ही व्यवहार को निर्धारित करती है।

मुख्य तत्व (Elements of Field Theory)

  1. शक्ति (Force) – यह वह प्रेरणा है जो किसी लक्ष्य की ओर व्यक्ति को खींचती है या दूर करती है। जैसे: भूख लगने पर भोजन की ओर आकर्षण।
  2. जीवन विस्तार (Life Space) – व्यक्ति का मनोवैज्ञानिक वातावरण जिसमें उसकी इच्छाएँ, आवश्यकताएँ, उद्देश्य और बाधाएँ सम्मिलित होती हैं।
  3. अवरोध (Barrier) – वे बाधाएँ जो लक्ष्य तक पहुँचने में अड़चन डालती हैं। जैसे: परीक्षा में अच्छे अंक लाने का लक्ष्य है, लेकिन आलस्य और ध्यान भटकना अवरोध हैं।
  4. लक्ष्य (Goal) – वह स्थिति जिसे प्राप्त करना व्यक्ति चाहता है। जैसे: परीक्षा पास करना, प्रतियोगिता जीतना, नौकरी पाना।

अतिरिक्त तथ्य

यह सिद्धांत Gestalt मनोविज्ञान से प्रभावित है।

कर्ट लेविन ने “Life Space” शब्द का प्रयोग करके बताया कि व्यक्ति और उसका पर्यावरण अलग नहीं हो सकते।

उन्होंने माना कि व्यक्ति हमेशा एक गतिशील क्षेत्र (Dynamic Field) में रहता है, जिसमें परिवर्तन लगातार होते रहते हैं।

यह सिद्धांत Group Dynamics (समूह गतिकी) और Leadership Studies में भी बहुत उपयोगी साबित हुआ।

लेविन ने "क्वासी-स्टेशनरी इक्विलिब्रियम" (Quasi-stationary equilibrium) का विचार दिया, जिसका मतलब है कि व्यक्ति का व्यवहार स्थिर नहीं होता बल्कि परिस्थितियों से बदलता रहता है।

शैक्षिक महत्व (Educational Significance)

  1. अभिप्रेरणा (Motivation): विद्यार्थियों में लक्ष्य-निर्देशित प्रयास को बढ़ावा देता है।
  2. पर्यावरण और व्यवहार: शिक्षक को यह समझना चाहिए कि अनुकूल वातावरण (सकारात्मक कक्षा का माहौल, शिक्षक का प्रोत्साहन, सहपाठी सहयोग) व्यवहार और सीखने को प्रभावित करता है।
  3. बाधाओं का समाधान: यदि छात्र किसी बाधा से जूझ रहा है (जैसे आत्मविश्वास की कमी), तो शिक्षक को उसे दूर करने की रणनीति बनानी चाहिए।
  4. समूह गतिविधियाँ (Group Activities): यह सिद्धांत बताता है कि समूह का माहौल व्यक्ति के व्यवहार पर असर डालता है, इसलिए शिक्षण में सहयोगात्मक शिक्षा (Cooperative Learning) लाभदायक है।

निष्कर्ष

लेविन का यह सिद्धांत बताता है कि व्यक्ति केवल अपने अंदर की प्रवृत्तियों से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय परिस्थितियों से भी प्रभावित होकर सीखता और व्यवहार करता है।

यानी, Learning = Motivation + Environment + Effort