नैतिक विकास का सिद्धांत

Theory of Moral Development : Lawrence Kohlberg

लॉरेंस कोहलबर्ग

लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg)

मुख्य बिंदु

प्रतिपादक: लॉरेंस कोहलबर्ग (अमेरिका)

जन्म-मृत्यु: 1927-1987

आधार: पियाजे के नैतिक विकास सिद्धांत का विस्तार।

मुख्य विचार: नैतिक विकास तीन स्तरों में होता है, प्रत्येक स्तर में दो अवस्थाएँ। अवस्थाओं का क्रम निश्चित (Invariant Sequence) और सार्वभौमिक है।

कोहलबर्ग ने नैतिक तर्कणा (Moral Reasoning) पर जोर दिया, जो Heinz Dilemma जैसे नैतिक द्वंद्वों से अध्ययन किया।

कोहलबर्ग के नैतिक विकास के तीन स्तर एवं छह अवस्थाएँ

कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को तीन स्तरों में विभाजित किया, प्रत्येक स्तर में दो अवस्थाएँ हैं। स्तर आत्म (Self) तथा प्रत्याशाओं (Expectations) के संबंध को दर्शाते हैं।

1. प्राक्-रूढ़िगत स्तर / पूर्व-परंपरागत स्तर (Pre-Conventional Level)

नियम बाहरी होते हैं, पुरस्कार-दंड पर आधारित। सही-गलत का कोई आंतरिक विचार नहीं।

  1. दंड एवं आज्ञाकारिता उन्मुखता (Punishment and Obedience Orientation): दंड से बचने के लिए नियमों का पालन। बड़े लोगों की आज्ञा मानना।
    उदाहरण: बच्चा चोरी नहीं करता क्योंकि पकड़े जाने पर मार पड़ेगी।
  2. साधनात्मक सापेक्षवादी उन्मुखता (Instrumental Relativist Orientation): पुरस्कार पाने या विनिमय के लिए व्यवहार। "तू मेरी मदद कर, मैं तेरी"।
    उदाहरण: बच्चा मदद करता है ताकि बदले में कुछ मिले।

2. परंपरागत स्तर / रूढ़िगत स्तर (Conventional Level)

नियम आंतरिकीकृत होते हैं। समाज की अपेक्षाओं और कानून पर जोर।

  1. परस्पर एकरूप अभिमुखता / अच्छा लड़का-अच्छी लड़की उन्मुखता (Good Boy-Good Girl Orientation): समाज से अनुमोदन पाने के लिए अच्छा व्यवहार। अच्छा दिखना।
    उदाहरण: बच्चा झूठ नहीं बोलता क्योंकि "अच्छे बच्चे झूठ नहीं बोलते"।
  2. अधिकार संरक्षण अभिमुखता / कानून एवं व्यवस्था उन्मुखता (Law and Order Orientation): सामाजिक एवं कानूनी नियमों का पालन। समाज की व्यवस्था बनाए रखना।
    उदाहरण: "कानून तोड़ना गलत है, चाहे कोई देखे या न देखे"।

3. उत्तर-रूढ़िगत स्तर / उत्तर-परंपरागत स्तर (Post-Conventional Level)

नैतिकता स्वतंत्र, सार्वभौमिक सिद्धांतों पर आधारित। उच्चतम स्तर।

  1. सामाजिक अनुबंध उन्मुखता (Social Contract Orientation): नियम लोकतांत्रिक समझौते से, बहुसंख्यक कल्याण पर जोर।
    उदाहरण: कानून बदल सकते हैं यदि वे न्यायपूर्ण न हों।
  2. सार्वभौमिक नीतिपरक उन्मुखता (Universal Ethical Principle Orientation): सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत (जैसे न्याय, मानवाधिकार)। स्वयं की अंतरात्मा।
    उदाहरण: गाँधी या मार्टिन लूथर किंग जैसे लोग - सिद्धांतों के लिए कानून तोड़ना।

कोहलबर्ग के सिद्धांत का शैक्षिक महत्व

  • शिक्षक बालक के व्यवहार को समझकर उचित दृष्टिकोण अपनाते हैं।
  • कुछ व्यवहार समय के साथ बदलते हैं, इसलिए अनावश्यक दंड से बचें।
  • अनुशासन, ईमानदारी, परीक्षा में कदाचार मुक्ति, समाज/राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी सिखाने में सहायक।
  • चर्चा, नैतिक द्वंद्व (Dilemmas), ग्रुप एक्टिविटी से उच्च स्तर विकसित करें।