नैतिक विकास का सिद्धांत

Jean Piaget

जीन पियाजे

जीन पियाजे (Jean Piaget)

मुख्य बिंदु

प्रतिपादक: जीन पियाजे (स्विस)

किताब: The Moral Judgment of the Child (1932)

मुख्य विचार: नैतिक विकास बौद्धिक विकास (Cognitive Development) से जुड़ा है। बच्चों के नैतिक निर्णय के विकास के क्रम में एक निश्चित क्रम एवं तार्किक पैटर्न होता है जो बौद्धिक विकास से सम्बंधित है

नैतिक विकास न्याय के परिपक्व तथा स्वः स्फूर्त प्रत्ययों की प्राप्ति है जिसे बालक अपने को वातावरण के साथ अंत: क्रिया करते है उन्हें परिवर्तित एवं परिमार्जित करते है।

पियाजे ने नैतिक विकास को संज्ञानात्मक अवस्थाओं से जोड़ा: बच्चे पहले नियमों को बाहरी और अपरिवर्तनीय मानते हैं, बाद में सामाजिक समझौते और इरादे पर आधारित बनाते हैं।

नैतिक विकास की अवस्थाएँ (Stages – विस्तृत व्याख्या)

अवस्था / प्रकार आयु (लगभग) मुख्य विशेषताएँ मुख्य आधार / विशेषता उदाहरण
1. प्रतिमान हीनता (Anomy / Premoral) जन्म से 5 वर्ष तक कोई नैतिक समझ नहीं। सामाजिक बंधन, कानून, प्रतिबंध से अनभिज्ञ। व्यवहार सुख-दुख पर आधारित। कोई नियम नहीं, सिर्फ व्यक्तिगत इच्छा। बच्चा खिलौना छीन लेता है क्योंकि "मुझे चाहिए"। दंड से डरता है लेकिन समझ नहीं। छोटा बच्चा रोकर मांगता है, नियम नहीं समझता।
2. परायत्त-सत्ता / Heteronomy (Moral Realism / नैतिक यथार्थता) 5-8 वर्ष तक नियम अपरिवर्तनीय, बाहरी सत्ता (अभिभावक/शिक्षक) से। पुरस्कार-दंड से प्रभावित। परिणाम पर जोर, इरादे पर नहीं। नैतिक यथार्थता: दबाव से नियम स्वीकार। Expiatory Punishment (प्रायश्चित दंड), Objective Responsibility। बच्चा गलती से 5 कप तोड़ता है तो ज्यादा दोषी, जानबूझकर 1 तोड़ने वाला कम। क्लास: "सर ने कहा तो गलत है"। स्कूल में "टीचर ने मारा तो सही" सोचना।
3. परायत्तता-पारस्परिकता / Heteronomy-Reciprocity (Transitional) 9-13 वर्ष सहयोग पर बल, समान आयु वर्ग/वयस्कों से प्रभावित। "मुझे दुख न पहुंचे" आधार। नियम बदल सकते हैं लेकिन सहमति से। Reciprocity (पारस्परिकता), Intentions महत्वपूर्ण होने लगते हैं। बच्चा कहता है "अगर मैं मदद करूं तो वो भी करेगा"। खेल में नियम बदलने पर सहमत होता है। दोस्तों के साथ "तू मेरी मदद कर, मैं तेरी"।
4. स्वायत्तता (Autonomy / Moral Relativism / नैतिक सापेक्षता) 13 वर्ष से किशोरावस्था (Adolescence) पूर्ण सोच-समझ, स्वयं उत्तरदायी। इरादे सबसे महत्वपूर्ण। नियम सामाजिक समझौते, आवश्यकतानुसार बदल सकते हैं। न्याय के आदर्श का अनुसरण। Morality of Cooperation, Subjective Responsibility। किशोर सोचता है "चोरी गलत क्योंकि किसी का अधिकार छीनना है, भले दंड न हो"। "आरक्षण गलत नहीं अगर जरूरतमंद को फायदा हो" (सापेक्षता)।
  • नोट: पियाजे की मुख्य किताब में दो प्रमुख अवस्थाएँ (Heteronomous → Autonomous) हैं, लेकिन कई स्रोतों में Premoral (Anomy) को अलग से जोड़ा जाता है।
  • नैतिक यथार्थता → Heteronomous का हिस्सा। नैतिक समानता → सहयोग और समानता पर जोर (Cooperative Games)।
  • नैतिक सापेक्षता → Relativism, जहां नियम सापेक्ष (Context-dependent)।

प्रमुख अंतर (Heteronomous vs Autonomous)

बिंदु Heteronomous (Moral Realism) Autonomous (Moral Relativism)
नियमों की प्रकृति अपरिवर्तनीय, बाहरी सत्ता द्वारा नियंत्रित बदल सकते हैं, सहमति से
न्याय का आधार परिणाम (Consequences) इरादे (Intentions)
दंड Expiatory (प्रायश्चित), मात्रा पर आधारित Restitutive (क्षतिपूर्ति), इरादे पर आधारित
जिम्मेदारी Objective (परिणाम से) Subjective (इरादे से)
उदाहरण "कप तोड़ने से ज्यादा दंड" "जानबूझकर तोड़ना ज्यादा गलत"

उदाहरण

  • Heteronomous: बच्चा कहता है "मैंने झूठ नहीं बोला क्योंकि मम्मी ने डांटा नहीं" (परिणाम पर फोकस)। भारतीय स्कूल: "कॉपी चुराई लेकिन पकड़ा नहीं गया तो ठीक"।
  • Autonomous: किशोर सोचता है "झूठ बोलना गलत क्योंकि दोस्त का विश्वास टूटेगा" (इरादे और प्रभाव पर)। "आरक्षण गलत नहीं अगर जरूरतमंद को फायदा हो" (सापेक्षता)।
  • खेल का उदाहरण (पियाजे ने मार्बल्स गेम से अध्ययन किया): छोटा बच्चा नियम नहीं बदलता, बड़ा बच्चा कहता है "सभी सहमत हों तो बदल सकते हैं"।

शैक्षिक निहितार्थ (Educational Implications)

  • छोटे बच्चों को स्पष्ट नियम और दंड-पुरस्कार से सिखाएं।
  • बड़े बच्चों में चर्चा, सहयोगात्मक गतिविधियाँ (Group Activities) से नैतिक समझ विकसित करें।
  • नैतिक शिक्षा में इरादे पर जोर दें, न कि सिर्फ परिणाम पर।
  • CTET प्रश्न: "पियाजे के अनुसार नैतिक यथार्थता कब होती है?" (5-10 वर्ष)।

नैतिक विकास की तीन स्तर

आलोचनाएँ / सुधार

  • आयु सीमाएँ सांस्कृतिक रूप से भिन्न हो सकती हैं (भारतीय बच्चों में जल्दी विकसित हो सकती है)।
  • कोहलबर्ग ने इसे विस्तार दिया (6 Stages)।
  • आधुनिक शोध: बच्चे इरादे जल्दी समझते हैं।