पर्यावरण संरक्षण का परिचय

पर्यावरण संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता, और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने की प्रक्रिया है। यह जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक उपयोग को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत में कई संस्थान पर्यावरण संरक्षण, अनुसंधान, और शिक्षा के लिए कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, अंटार्कटिका में भारतीय शोध स्थल वैश्विक पर्यावरण अध्ययन में योगदान दे रहे हैं। यह जानकारी SSC, PCS, TET, IAS, और Railway जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है, जहाँ पर्यावरण अध्ययन एक महत्वपूर्ण विषय है।

पर्यावरण संस्थान

भारत में पर्यावरण संरक्षण और अनुसंधान के लिए कई प्रमुख संस्थान स्थापित हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों जैसे वन, वनस्पति, प्राणी, और प्रदूषण नियंत्रण में कार्य करते हैं। निम्नलिखित तालिका में प्रमुख संस्थानों और उनके स्थानों की सूची दी गई है:

संस्थान स्थान
भारतीय वानस्पतिक सर्वेक्षण कोलकाता
भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण कोलकाता
भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून
वन अनुसंधान संस्थान देहरादून
केन्द्रीय मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान देहरादून
लकड़ी विज्ञान और अनुसंधान संस्थान बंगलुरू
पारिस्थितिकी विज्ञान केन्द्र बंगलुरू
पर्यावरण शिक्षा केन्द्र चेन्नई एवं बंगलुरू
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नई दिल्ली
जल प्रबंधन अभियांत्रिकी संस्थान नई दिल्ली
केन्द्रीय मृदा संरक्षण संस्थान नई दिल्ली
हिमालय वन अनुसंधान संस्थान शिमला
वन उत्पादकता केन्द्र रांची
राष्ट्रपति वनस्पति विज्ञान संस्थान लखनऊ
केन्द्रीय पक्षी शोध संस्थान इज्जतनगर (बरेली)
केन्द्रीय वर्षा वन अनुसंधान संस्थान जोरहाट (असम)
सामाजिक वानिकी एवं पारिस्थितिक पुनर्स्थापना केन्द्र इलाहाबाद
वानिकी अनुसंधान तथा मानव संसाधन विकास संस्थान छिंदवाड़ा
उष्ण कटिबंधीय संस्थान जबलपुर
उच्च अक्षांश अनुसंधान प्रयोगशाला गुलमर्ग
भारतीय प्राणी कल्याण संस्थान वल्लभगढ़ (हरियाणा)
सलीम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास संस्थान कोयंबटूर
खनन पर्यावरण केन्द्र अहमदाबाद
उष्ण कटिबंधीय वनस्पति उद्यान एवं अनुसंधान केन्द्र तिरुवनंतपुरम
राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी शोध संस्थान (NEERI) नागपुर

अन्य संस्थान

पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण संस्थान जो कृषि, समुद्र, और मौसम विज्ञान जैसे क्षेत्रों में कार्य करते हैं, निम्नलिखित हैं:

संस्थान स्थान
राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई
शीतोष्ण वन अनुसंधान केन्द्र हिमाचल प्रदेश
केन्द्रीय शुष्क भूमि खेती अनुसंधान संस्थान हैदराबाद
राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी हैदराबाद
उद्यान एवं वानिकी विश्वविद्यालय सोलन (हिमाचल प्रदेश)
केन्द्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान केन्द्र झांसी
भारतीय चावल शोध संस्थान कटक (ओडिशा)
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल (हरियाणा)
भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर
केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ
इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस नागपुर
राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कानपुर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग नई दिल्ली
केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) जोधपुर (राजस्थान)
नेशनल प्लांट जीनोमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट नई दिल्ली

अंटार्कटिका में स्थापित भारतीय शोध स्थल

अंटार्कटिका में भारत ने अब तक तीन स्थायी वैज्ञानिक शोध केन्द्र (Research Stations) स्थापित किए हैं। ये भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम (Indian Antarctic Programme) के अंतर्गत कार्य करते हैं, जिसका संचालन राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केन्द्र (NCPOR), गोवा करता है।

👉 सारांश

शैक्षणिक महत्व

पर्यावरण संरक्षण और इससे संबंधित संस्थानों की जानकारी SSC, PCS, TET, IAS, और Railway जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण है। ये संस्थान और शोध स्थल पर्यावरणीय नीतियों, संरक्षण, और अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के योगदान को दर्शाते हैं। छात्रों को इनके नाम और स्थान याद रखने चाहिए, क्योंकि ये सामान्य ज्ञान और पर्यावरण अध्ययन के प्रश्नों में बार-बार पूछे जाते हैं।

✅ आसान याद रखने की बातें

सारांश

पर्यावरण संरक्षण भारत और वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण विषय है। भारत में स्थापित पर्यावरण संस्थान जैसे भारतीय वन सर्वेक्षण, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी शोध संस्थान (NEERI) पर्यावरण संरक्षण और अनुसंधान में योगदान दे रहे हैं। अंटार्कटिका में दक्षिण गंगोत्री, मैत्री, और भारती जैसे शोध स्थल वैश्विक जलवायु अध्ययन में भारत की भूमिका को दर्शाते हैं। यह जानकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (भारत)

भारत में अनेक स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। ये स्थल भारतीय संस्कृति, इतिहास, कला और प्राकृतिक विविधता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। वर्तमान में भारत में कुल 42 विश्व धरोहर स्थल (2025 तक) सम्मिलित हैं, जिनमें सांस्कृतिक, प्राकृतिक और मिश्रित स्थल शामिल हैं।

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