उत्तर प्रदेश: मूल तथ्य
भौगोलिक स्थिति
उत्तर प्रदेश भारत के उत्तरी भाग में स्थित है। इसकी सीमाएँ उत्तर में उत्तराखंड और नेपाल,
पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, पूर्व में बिहार
और झारखंड से लगती हैं।
जलवायु
उत्तर प्रदेश की जलवायु उपोष्णकटिबंधीय मानसूनी है। ग्रीष्म ऋतु में तापमान 45°C तक पहुँच जाता
है, जबकि शीत ऋतु में 5°C तक गिर जाता है। औसत वार्षिक वर्षा 100 से 200 सेमी के बीच होती है।
मृदा प्रकार
राज्य में मुख्यतः तीन प्रकार की मिट्टी पाई जाती है: जलोढ़ मिट्टी (गंगा मैदान), काली मिट्टी
(बुंदेलखंड), और लाल मिट्टी (विंध्य क्षेत्र)। जलोढ़ मिट्टी सबसे उपजाऊ है और गेहूं, चावल,
गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त है।
नदियाँ (Rivers of Uttar Pradesh)
- गंगा नदी: उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण नदी, जो राज्य में 631 किमी बहती है। हरिद्वार से
प्रवेश कर प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर से होकर बिहार में प्रवेश करती है।
- यमुना नदी: गंगा की सबसे लंबी सहायक नदी, राज्य में 1,376 किमी बहती है। प्रयागराज में गंगा
से मिलती है।
- घाघरा नदी: हिमालय से निकलने वाली यह नदी बहराइच, गोंडा, फैजाबाद से होकर बहती है और छपरा के
पास गंगा में मिल जाती है।
- गोमती नदी: पीलीभीत से निकलकर लखनऊ, सुल्तानपुर, जौनपुर से होकर गाजीपुर में गंगा में मिलती
है।
- सरयू नदी: यह नदी बहराइच, गोंडा, फैजाबाद से होकर बहती है और घाघरा में मिल जाती है।
- बेतवा नदी: विंध्य पर्वत से निकलकर झांसी, ओरछा से होकर बहती है और यमुना में मिल जाती है।
नोट: नदियाँ राज्य की जीवनरेखा हैं, लेकिन प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से खतरा। सतत
प्रबंधन आवश्यक, जैसे नमामी गंगे परियोजना।
पर्वत और पहाड़ियाँ (Mountains & Hills of Uttar Pradesh)
- तराई एवं भाभर क्षेत्र: उत्तरी उत्तर प्रदेश में हिमालय की तलहटी में स्थित, यह क्षेत्र नम
और दलदली है। यहाँ घने वन और वन्यजीव पाए जाते हैं।
- शिवालिक पहाड़ियाँ: सहारनपुर जिले में स्थित, ये हिमालय की सबसे दक्षिणी श्रेणी हैं।
- विंध्य पर्वतमाला: दक्षिणी उत्तर प्रदेश में फैली यह पर्वत श्रृंखला मिर्जापुर, सोनभद्र और
ललितपुर जिलों में स्थित है।
- कैमूर पहाड़ियाँ: सोनभद्र जिले में स्थित, ये पहाड़ियाँ खनिज संपदा से भरपूर हैं।
नोट: पहाड़ियाँ जैव विविधता और जल स्रोत प्रदान करती हैं, लेकिन वनों की कटाई से
मिट्टी क्षरण हो रहा है। संरक्षण से पर्यटन बढ़ सकता है।
पठार (Plateaus of Uttar Pradesh)
- बुंदेलखंड का पठार: यह पठारी क्षेत्र झांसी, ललितपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जिलों में
फैला है। यहाँ की मिट्टी कम उपजाऊ है और जल संकट एक बड़ी समस्या है।
- विंध्य पठार: मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों में फैला यह पठार खनिज संपदा से भरपूर है।
- बघेलखंड का पठार: सोनभद्र जिले का कुछ हिस्सा इस पठार में आता है।
नोट: पठार खनिज समृद्ध लेकिन जल संकटग्रस्त; सतत खनन और जल संरक्षण आवश्यक।
वन और वनस्पति (Forests & Vegetation of Uttar Pradesh)
वन क्षेत्र (2021):
6.88% (भौगोलिक क्षेत्र)
- तराई और भाभर क्षेत्र के वन: उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन, साल प्रमुख वृक्ष।
- दुधवा नेशनल पार्क: लखीमपुर खीरी जिले में स्थित, यह बाघ संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
- पीलीभीत टाइगर रिज़र्व: पीलीभीत जिले में स्थित, यह तराई क्षेत्र में बाघों का महत्वपूर्ण
आवास है।
- बुंदेलखंड और सोनभद्र के वन: शुष्क पर्णपाती वन, सागौन, बबूल प्रमुख वृक्ष।
- प्रमुख वृक्ष: साल, शीशम, सागौन, आम, बबूल, नीम।
- वन्य जीव संरक्षण: बाघ, हाथी, बारहसिंगा, मगरमच्छ, गिद्ध; दुधवा में संरक्षण।
नोट: वन जैव विविधता बनाए रखते हैं, लेकिन 2024 में 133 हेक्टेयर हानि हुई।
इको-टूरिज्म से संरक्षण और आय बढ़ सकती है।
यातायात एवं परिवहन (Transport in Uttar Pradesh)
- सड़क परिवहन: 8500 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग, 8,432 किमी राज्य राजमार्ग; सबसे बड़ा नेटवर्क।
प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग: NH-2 (ग्रांड ट्रंक रोड), NH-24, NH-25, NH-26, NH-27, NH-28, NH-29
- रेलवे नेटवर्क: सबसे बड़ा रेल नेटवर्क; जंक्शन- लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर।
उत्तर रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, पूर्वोत्तर रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे और उत्तर पूर्वी सीमांत रेलवे का
हिस्सा
- नदी परिवहन: गंगा NW-1, वाराणसी-हल्दिया; माल ढुलाई बढ़ाती। प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर में
प्रमुख नदी बंदरगाह
- वायु परिवहन: लखनऊ (चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा), वाराणसी (लाल बहादुर शास्त्री
अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा), प्रयागराज, कुशीनगर, गोरखपुर, आगरा, झांसी, कानपुर हवाई अड्डे
नोट: परिवहन विकास को गति देता है, लेकिन ट्रैफिक, प्रदूषण चुनौती। सतत परिवहन जैसे EV
जरूरी। महत्वपूर्ण तथ्य: 50 विश्व स्तरीय रेल स्टेशन।