किशोरावस्था: परिचय
जीवन काल की वह अवधि जब शरीर में ऐसे परिवर्तन होते हैं जिसके परिणामस्वरूप जनन परिपक्वता आ जाती है, किशोरावस्था कहलाती है। यह अवधि सामान्यतः 11-12 वर्ष से प्रारंभ होकर 18-19 वर्ष तक रहती है। इस दौरान शारीरिक, मानसिक, और संवेदनात्मक परिवर्तन होते हैं जो व्यक्ति को वयस्कता के लिए तैयार करते हैं।
उम्र के साथ शारीरिक बदलाव
किशोरावस्था में शरीर में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं, जो निम्नलिखित हैं:
- लंबाई में वृद्धि: किशोरावस्था में हड्डियों और मांसपेशियों का तेजी से विकास होता है, जिससे लंबाई बढ़ती है।
- शारीरिक बनावट में परिवर्तन: कंधे चौड़े (लड़कों में) और कूल्हे चौड़े (लड़कियों में) होने जैसे बदलाव।
- स्वर में बदलाव: लड़कों का स्वर गहरा और भारी हो जाता है, जबकि लड़कियों का स्वर उच्च तारत्व (पिच) वाला होता है। लड़कों में स्वर यंत्र के उभार को कंठ मणि (एडम्स ऐपल) कहते हैं।
- स्वेद और तेल ग्रंथियों में सक्रियता: पसीने और तैलीय स्राव बढ़ते हैं, जिससे मुहांसे हो सकते हैं।
- जननांगों की परिपक्वता: नर और मादा जननांग परिपक्व होकर प्रजनन के लिए तैयार होते हैं।
- मानसिक और संवेदनात्मक विकास: स्वतंत्र सोच, भावनात्मक संवेदनशीलता, और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
स्वास्थ्य पोषण योजना
किशोरावस्था में तेजी से होने वाले शारीरिक विकास के लिए संतुलित आहार आवश्यक है। पोषण योजना में शामिल होना चाहिए:
- प्रोटीन (दाल, अंडा, दूध) मांसपेशियों और ऊतकों के लिए।
- कार्बोहाइड्रेट (अनाज, चावल) ऊर्जा के लिए।
- विटामिन और खनिज (फल, सब्जियाँ) रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए।
- कैल्शियम और आयरन (दूध, पालक) हड्डियों और रक्त के लिए।
- पर्याप्त पानी और कम जंक फूड।
नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
द्वितीय लैंगिक लक्षण
कुछ लक्षण जो किशोरावस्था में विकसित होते हैं और पुरुष व स्त्री के अंतर को स्पष्ट करते हैं, द्वितीय लैंगिक लक्षण कहलाते हैं। उदाहरण:
- लड़कों में: चेहरे पर दाढ़ी और मूंछ, कंधों का चौड़ा होना, मांसपेशियों का विकास।
- लड़कियों में: स्तनों का विकास, कूल्हों का चौड़ा होना, शरीर का गोलाकार होना।
ये परिवर्तन हार्मोनों के प्रभाव से होते हैं। वृषण में टेस्टोस्टेरोन और अण्डाशय में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्राव शुरू होता है।
प्रजनन और जनन स्वास्थ्य
प्रजनन स्वास्थ्य में शारीरिक, मानसिक, और सामाजिक स्वास्थ्य शामिल है।
- ऋतु स्राव चक्र (मासिक धर्म): लड़कियों में 11-12 वर्ष की आयु से शुरू होकर 45-50 वर्ष तक चलता है। यह प्रत्येक 28-30 दिन में होता है। पहला मासिक धर्म रजोदर्शन और अंतिम रजोनिवृत्ति कहलाता है।
- विवाह की आयु: लड़कियों के लिए न्यूनतम 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष। इससे पहले विवाह शारीरिक और मानसिक रूप से हानिकारक है।
- स्वच्छता: मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता, जैसे सैनिटरी पैड का उपयोग और नियमित स्नान, महत्वपूर्ण है।
लिंग निर्धारण
मनुष्य में 23 जोड़े (46) गुणसूत्र होते हैं। 22 जोड़े शारीरिक लक्षणों (रंग, लंबाई) के लिए उत्तरदायी हैं, जबकि 23वाँ जोड़ा लिंग गुणसूत्र (X और Y) है।
- XX: लड़की।
- XY: लड़का। Y गुणसूत्र लड़का होने के लिए उत्तरदायी है।
भारत सरकार ने लिंगानुपात असमानता को दूर करने के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (22 जनवरी 2015) और PCPNDT Act 1994 (कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए प्रसव पूर्व लिंग जाँच पर प्रतिबंध) लागू किया।
धूम्रपान और मादक द्रव्यों के दुष्प्रभाव
धूम्रपान और मादक द्रव्यों का सेवन किशोरों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
- धूम्रपान: फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, श्वसन समस्याएँ।
- मादक द्रव्य: मस्तिष्क क्षति, यकृत रोग, मानसिक विकार।
- विश्व तंबाकू निषेध दिवस: 31 मई को मनाया जाता है।
किशोरों को इनके प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है।
जनसंख्या वृद्धि: कारण और कुप्रभाव
2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की जनसंख्या लगभग 121 करोड़ थी, और यह विश्व में दूसरा स्थान रखता है। विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई को मनाया जाता है।
कारण:
- उच्च जन्म दर।
- निम्न मृत्यु दर (चिकित्सा सुधार के कारण)।
- शिक्षा और जागरूकता की कमी।
- प्रजनन-निरोध विधियों का कम उपयोग।
कुप्रभाव:
- संसाधनों की कमी (पानी, भोजन, आवास)।
- बेरोजगारी और गरीबी।
- पर्यावरण प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का ह्रास।
प्रजनन-निरोध विधियों का प्रसार
जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रजनन-निरोध विधियाँ महत्वपूर्ण हैं। इनमें शामिल हैं:
- अस्थायी विधियाँ: कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियाँ, कॉपर-टी।
- स्थायी विधियाँ: नसबंदी (पुरुषों में), ट्यूबेक्टॉमी (महिलाओं में)।
इन विधियों का प्रसार जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से किया जाता है।
परिवार कल्याण कार्यक्रम
भारत सरकार ने परिवार कल्याण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं:
- मिशन इंद्रधनुष: 25 दिसंबर 2014 को शुरू, 2020 तक बच्चों को डिप्थीरिया, खसरा, पोलियो आदि के सात टीकों से पूर्ण टीकाकरण।
- जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK): 1 जून 2011 को शुरू, गर्भवती महिलाओं और नवजातों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएँ।
- जननी सुरक्षा योजना: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत, गरीब गर्भवती महिलाओं के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन: 102 (राष्ट्रीय) और 108 (प्रादेशिक) नंबरों पर एम्बुलेंस सेवाएँ।