खनिजों का सामान्य परिचय
भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अकार्बनिक तत्व अथवा यौगिकों को खनिज कहते हैं। उदाहरण के लिए, क्वार्ट्ज, माइका (अभ्रक), हेमेटाइट, बॉक्साइट, अर्जेन्टाइट, और ग्रेनाइट खनिज हैं। चट्टानें मुख्य रूप से सिलिकेट्स से बनी होती हैं। खनिज धातु और अधातु दोनों प्रकार के हो सकते हैं, और ये तत्वों के यौगिक भी हो सकते हैं। उदाहरण: सोना (Au) और प्लैटिनम (Pt) धातुएं प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं।
अयस्क और धातु कर्म
ऐसे खनिज, जिनसे धातु का निष्कर्षण अधिक मात्रा में, सरलता से, और कम लागत में हो जाता है, अयस्क कहलाते हैं। सभी अयस्क खनिज होते हैं, परन्तु सभी खनिज अयस्क नहीं होते। अयस्क से धातु या अधातु प्राप्त करने और उन्हें विभिन्न उपयोगों के लिए शुद्ध करने के विज्ञान को धातु कर्म (Metallurgy) कहते हैं।
| धातु | अयस्क का नाम | रासायनिक सूत्र | अयस्क का रूप | प्राप्ति स्थान |
|---|---|---|---|---|
| मैग्नीशियम | मैगनेसाइट | MgCO₃ | कार्बोनेट | भारत (तमिलनाडु, उत्तराखंड) |
| जिंक | कैलेमाइन | ZnCO₃ | कार्बोनेट | भारत (राजस्थान) |
| लेड | गैलेना | PbS | सल्फाइड | भारत (आंध्र प्रदेश) |
| कॉपर | कॉपर ग्लांस | Cu₂S | सल्फाइड | भारत (झारखंड, राजस्थान) |
| आयरन | हेमेटाइट | Fe₂O₃ | ऑक्साइड | भारत (झारखंड, ओडिशा) |
| एल्यूमिनियम | बॉक्साइट | Al₂O₃·2H₂O | ऑक्साइड | भारत (ओडिशा, गुजरात) |
| सिल्वर | अर्जेन्टाइट | Ag₂S | सल्फाइड | भारत (कर्नाटक) |
| कैल्सियम | जिप्सम | CaSO₄·2H₂O | सल्फेट | भारत (राजस्थान) |
| मैंगनीज | पायरोलुसाइट | MnO₂ | ऑक्साइड | भारत (मध्य प्रदेश) |
धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुण
सामान्य ताप पर अधिकांश धातुएं ठोस होती हैं, सिवाय पारा (Hg) के, जो द्रव होता है। सोडियम, पोटैसियम, मैग्नीशियम, और पारा को छोड़कर अन्य धातुएं कठोर होती हैं। धातुओं को पीटकर चादरों में परिवर्तित करने के गुण को अघातवर्धनीयता कहते हैं, और तार में परिवर्तित करने के गुण को तन्यता कहते हैं। सभी धातुएं विद्युत और ऊष्मा की सुचालक होती हैं।
अधातुएं सामान्य ताप पर गैसीय (जैसे, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन), ठोस (जैसे, आयोडीन, कार्बन, सल्फर, सिलिका), या द्रव (जैसे, ब्रोमीन) अवस्था में होती हैं। कार्बन का अपरूप हीरा सबसे कठोर पदार्थ है, जबकि ग्रेफाइट (कार्बन का अपरूप) विद्युत का सुचालक है। अधिकांश अधातुएं विद्युत और ऊष्मा की कुचालक होती हैं। जर्मेनियम, आर्सेनिक, और एंटीमनी जैसे तत्वों में धातु और अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं और इन्हें उपधातु (Metalloids) कहते हैं।
धातुओं और अधातुओं के रासायनिक गुण
- ऑक्सीजन से अभिक्रिया: धातुएं ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं, जो सामान्यतः क्षारीय होते हैं। उदाहरण: 2Mg + O₂ → 2MgO। अधातुएं ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं। उदाहरण: S + O₂ → SO₂ (अम्लीय)।
- जल से अभिक्रिया: सक्रिय धातुएं (जैसे, Na, K) जल से अभिक्रिया करके धातु हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। उदाहरण: 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑। अधातुएं सामान्यतः जल से अभिक्रिया नहीं करतीं।
- अम्ल से अभिक्रिया: धातुएं अम्ल (जैसे, HCl, H₂SO₄) से अभिक्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। उदाहरण: Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑। सल्फर जैसे अधातु नाइट्रिक अम्ल से अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल बनाते हैं: S + 6HNO₃ → H₂SO₄ + 6NO₂ + 2H₂O।
- सोडियम और पोटैसियम: ये अत्यधिक क्रियाशील धातुएं हैं, जिन्हें ऑक्सीकरण से बचाने के लिए मिट्टी के तेल में डूबाकर रखा जाता है।
धातुओं और अधातुओं के उपयोग
- धातुओं के उपयोग:
- एल्यूमिनियम: हवाई जहाज, बर्तन, बिजली के तार।
- कॉपर: विद्युत तार, सिक्के।
- लोहा: भवन निर्माण, मशीनरी।
- सोना और चांदी: आभूषण, सिक्के।
- अधातुओं के उपयोग:
- कार्बन (हीरा): आभूषण, काटने के उपकरण।
- कार्बन (ग्रेफाइट): पेंसिल लेड, इलेक्ट्रोड।
- सल्फर: बारूद, दवाइयां।
- ऑक्सीजन: श्वसन, जलन।
धातुओं का संक्षारण: कारण और समाधान
धातु की सतह पर उसका यौगिक बनने से धातु की एक-एक परत के रूप में नष्ट होने की प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। उदाहरण: लोहे पर भूरी परत (जंग) आयरन ऑक्साइड (Fe₂O₃·nH₂O) के बनने के कारण होती है, जिसे जंग लगना कहते हैं।
- कारण: नमी, ऑक्सीजन, और अम्ल की उपस्थिति में धातु संक्षारण होता है।
- समाधान:
- रंगाई: धातु पर पेंट लगाना।
- गैल्वोनीकरण: लोहे पर जस्ते (Zn) की परत चढ़ाना।
- मिश्र धातु: स्टेनलेस स्टील जैसे संक्षारण-प्रतिरोधी मिश्र धातु बनाना।
- तेल या ग्रीस: धातु को नमी से बचाने के लिए तेल लगाना।
गैल्वोनीकरण
लोहे को संक्षारण से बचाने के लिए उस पर जस्ते की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को गैल्वोनीकरण कहते हैं। यह जस्ते की बलिदानी परत (sacrificial layer) के कारण प्रभावी होता है, क्योंकि जस्ता लोहे से पहले संक्षारित होता है। उदाहरण: गैल्वनाइज्ड पाइप, बाल्टियां।
मिश्र धातु: विशेषता और उपयोगिता
मिश्र धातु दो या दो से अधिक धातुओं या धातु और अधातु का समांगी मिश्रण है, जो विशिष्ट गुण प्रदान करता है।
| मिश्र धातु | अवयवी तत्व | उपयोग |
|---|---|---|
| पीतल | तांबा, जस्ता | बर्तन, तार, वाद्य यंत्र |
| कांसा | तांबा, टिन | सिक्का, घंटा, मेडल, गहने |
| सोल्डर | सीसा, टिन | विद्युत परिपथ में टांका लगाने में |
| स्टेनलेस स्टील | लोहा, क्रोमियम, निकिल | बर्तन, उपकरण, छुरी, कांटे |
विशेषताएं: मिश्र धातु कठोर, संक्षारण-प्रतिरोधी, और विशिष्ट उपयोग के लिए अनुकूलित होती हैं। उदाहरण: स्टेनलेस स्टील में क्रोमियम संक्षारण प्रतिरोध बढ़ाता है।
पिग आयरन और इस्पात: वात्या भट्टी से प्राप्त लोहा पिग आयरन (कच्चा लोहा) कहलाता है, जिसमें 93% लोहा, 4-5% कार्बन, और सल्फर, फॉस्फोरस, सिलिकॉन की अशुद्धियां होती हैं। इस्पात में 98.8-99.8% लोहा, 0.25-1.5% कार्बन, और Si, S, Mn की अशुद्धियां होती हैं, जो इसे मजबूत और उपयोगी बनाती हैं।