जल का संघटन
जल एक रासायनिक यौगिक है जिसमें दो हाइड्रोजन परमाणु और एक ऑक्सीजन परमाणु (H₂O) सहसंयोजी बंधन से जुड़े होते हैं। उदाहरण: जल अणु में दो H और एक O परमाणु कोण 104.5° पर जुड़े होते हैं।
- अनुपात: हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात 1:8 (2:16)।
- अणु संरचना: वाक्यूम और सामान्य परिस्थितियों में ध्रुवीय अणु।
- महत्व: जल जीवन का आधार है, शरीर में रासायनिक क्रियाओं के लिए आवश्यक।
- वास्तविक जीवन में उपयोग: पीने का पानी, कृषि, उद्योग।
जल के भौतिक गुण
वे गुण जो रासायनिक परिवर्तन के बिना देखे जा सकते हैं।
- रंग: रंगहीन। उदाहरण: गिलास में साफ जल।
- गंध: गंधहीन।
- स्वाद: स्वादहीन, पर शुद्ध जल में हल्का मीठा अनुभव।
- अवस्था: सामान्य ताप पर द्रव, 0°C पर ठोस (बर्फ), 100°C पर वाष्प।
- क्वथनांक: 100°C (1 atm पर)।
- हिमांक: 0°C।
- सघनता: 1 g/cm³ (4°C पर अधिकतम)।
- विशेष गुण: उच्च सतही तनाव और उष्मा क्षमता।
जल के रासायनिक गुण
वे गुण जो रासायनिक अभिक्रियाओं में प्रकट होते हैं।
- तटस्थ प्रकृति: न अम्लीय, न क्षारीय। उदाहरण: लिटमस पेपर पर कोई परिवर्तन नहीं।
- अभिक्रियाशीलता: कुछ धातुओं और क्षारों के साथ प्रतिक्रिया करता है।
- उदाहरण:
- सोडियम + जल → सोडियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन गैस।
- पोटैशियम + जल → पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन गैस।
- ऑक्सीडाइजिंग और रेड्यूसिंग एजेंट के साथ: जल ऑक्सीडाइजिंग एजेंटों और रेड्यूसिंग एजेंटों के साथ प्रतिक्रिया करता है।
जल की धातुओं के साथ क्रिया
- सक्रिय धातुएँ: सोडियम, पोटैशियम, कैल्सियम। उदाहरण: जल + सोडियम → सोडियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन।
- कम सक्रिय धातुएँ: लोहा, तांबा, निकेल। उदाहरण: लोहा + भाप → आयरन ऑक्साइड।
- विशेष तथ्य: जल धातु ऑक्साइड या हाइड्रॉक्साइड बनाने में सक्षम।
जल एक विलायक के रूप में
जल कई पदार्थों को घोलने की क्षमता रखता है।
- ध्रुवीयता: जल ध्रुवीय अणु है और आयनिक व ध्रुवीय यौगिकों को घोल सकता है।
- उदाहरण: नमक, चीनी, बेकिंग सोडा जल में घुलते हैं।
- अनुप्रयोग: रासायनिक प्रयोगशाला, औषधियाँ, उद्योग, भोजन।
- विशेष तथ्य: "सर्वश्रेष्ठ विलायक" कहा जाता है।
जल के अतिरिक्त तथ्य
- जल का अणु त्रिकोणीय है और ध्रुवीयता के कारण हाइड्रोजन बंध बनाता है।
- हाइड्रोजन बंधों के कारण जल का क्वथनांक सामान्य अपेक्षा से अधिक है।
- जल की उच्च विशिष्ट उष्मा इसे जलवायु नियंत्रक बनाती है।
- जल का आयनिक विक्षेपण समुद्री जीवन के लिए आवश्यक है।
- जल का अपवर्तनांक प्रकाश और ऑप्टिकल उपकरणों में उपयोगी है।
- जल का घनत्व 0°C पर कम होने के कारण बर्फ ऊपर तैरती है।
जल का खारापन
जल में घुले लवणों (जैसे सोडियम क्लोराइड, मैग्नीशियम सल्फेट) की उपस्थिति। उदाहरण: समुद्री जल का खारा स्वाद।
- कारण: नदियों और वर्षा द्वारा खनिजों का समुद्र और झीलों में स्थानांतरण।
- प्रभाव: पीने के लिए अनुपयुक्त, कृषि और उद्योग में समस्या।
- विशेष तथ्य: समुद्र का जल लगभग 3.5% खारा होता है।
- उपयोग: समुद्री जल से नमक प्राप्त करना।
जल की कठोरता
जल में कैल्सियम और मैग्नीशियम लवणों की उपस्थिति, जो साबुन को झाग बनाने में बाधा डालते हैं। उदाहरण: कठोर जल में साबुन कम झाग देता है।
- प्रभाव: पाइपों और उपकरणों में स्केल जमना, औद्योगिक और घरेलू उपयोग में बाधा।
- महत्व: पानी का स्वास्थ्य और औद्योगिक प्रक्रिया पर प्रभाव।
जल की कठोरता के प्रकार
- अस्थायी कठोरता: कैल्सियम/मैग्नीशियम बाइकार्बोनेट के कारण। उदाहरण: केतली में स्केल जमना।
- स्थायी कठोरता: कैल्सियम/मैग्नीशियम सल्फेट या क्लोराइड के कारण। उदाहरण: उबालने पर भी हटती नहीं।
- विशेष तथ्य: अस्थायी कठोरता को उबालने से हटाया जा सकता है, स्थायी कठोरता केवल रासायनिक या तकनीकी उपायों से।
जल की कठोरता दूर करने की विधियाँ
कठोर जल को मुलायम बनाने की प्रक्रियाएँ।
- उबालना: अस्थायी कठोरता को हटाता है। उदाहरण: बाइकार्बोनेट का विघटन।
- आसवन (Distillation): सभी लवण और अशुद्धियाँ हटाता है। उदाहरण: प्रयोगशाला में शुद्ध जल।
- वाशिंग सोडा (Sodium Carbonate): कैल्सियम/मैग्नीशियम लवणों को अवक्षेपित करता है।
- आयन विनिमय (Ion Exchange): कठोरता उत्पन्न करने वाले आयनों को सोडियम आयनों से बदलना। उदाहरण: वाटर सॉफ्टनर।
- रिवर्स ऑस्मोसिस (RO): अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा लवण और अशुद्धियों को हटाना।
- जियोलाइट विधि (Zeolite): जियोलाइट के माध्यम से आयन विनिमय। उदाहरण: घरेलू वाटर सॉफ्टनर।
जियोलाइट विधि
जियोलाइट (सोडियम एल्यूमिनोसिलिकेट) कठोर जल के कैल्सियम और मैग्नीशियम आयनों को सोडियम आयनों से बदलता है।
- प्रक्रिया: कठोर जल जियोलाइट बेड से गुजरता है, जिससे आयन विनिमय होता है।
- उपयोग: घरेलू और औद्योगिक जल सॉफ्टनिंग।
- विशेष तथ्य: जियोलाइट विधि रासायनिक उपयोग के बिना पर्यावरण अनुकूल है।
आसुत जल (Distilled Water)
वाष्पीकरण और संघनन द्वारा शुद्ध किया गया जल। उदाहरण: प्रयोगशाला और औद्योगिक उपयोग।
- विशेषता: सभी लवण, धातु आयन और अशुद्धियों से मुक्त।
- उपयोग: चिकित्सा (इंजेक्शन), बैटरी, रासायनिक प्रयोग।
- विशेष तथ्य: आसुत जल का स्वाद और गंध बिल्कुल नहीं होती।
- ध्यान: रोजमर्रा के पीने के पानी के लिए लगातार आसुत जल पीना स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं।
अतिरिक्त तथ्य
- जल की कठोरता नदियों, झीलों और भूजल में भिन्न हो सकती है।
- कठोर जल में जमा स्केल से पाइपलाइन और हीटिंग उपकरणों की दक्षता घटती है।
- सागरीय जल का खारापन मीठे जल से बहुत अधिक होता है, औद्योगिक उपयोग के लिए पानी को सॉफ्टनिंग आवश्यक।
- RO और जियोलाइट विधि के संयोजन से पानी का गुणस्तर और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
जल प्रदूषण के कारण
जल प्रदूषण तब होता है जब जल में हानिकारक पदार्थ, रसायन या जीवाणु मिश्रित हो जाते हैं, जिससे जल जीवन और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
- कारण:
- औद्योगिक अपशिष्ट: कारखानों द्वारा रसायन, धातु, पेंट और तेल का जल में मिश्रण। उदाहरण: इलाहाबाद की नदियाँ रसायन से प्रदूषित।
- मलजल और घरेलू अपशिष्ट: घरों और शहरों से निकलने वाला गंदा पानी। उदाहरण: बाथरूम और किचन का अपशिष्ट।
- कृषि रसायन: कीटनाशक, उर्वरक और रासायनिक खाद का बहकर जल स्रोतों में जाना। उदाहरण: खेतों से बहकर नदियों में नाइट्रेट और फॉस्फेट का प्रवेश।
- तेल और पेट्रोलियम उत्पाद: तेल टैंकर रिसाव या जहाजों से तेल का समुद्र में गिरना। उदाहरण: समुद्र में तेल फैलने से समुद्री जीवन प्रभावित।
- गंदे औद्योगिक रसायन: जैसे पॉल्यूथीन, प्लास्टिक और रंग। उदाहरण: फैक्ट्री का पॉल्यूथीन जल में बहना।
जल प्रदूषण: समस्याएँ
समस्याएँ:
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: जलजनित रोग जैसे हैजा, डायरिया, टाइफाइड।
- जलीय जीवन को हानि: मछलियाँ, पानी के पौधे और जलीय जीव मरते हैं।
- जल की कमी: प्रदूषित जल पीने योग्य नहीं रहता।
- पानी की गुणवत्ता घटती है: भारी धातु और रसायन जल स्रोतों में जमा।
- आर्थिक प्रभाव: मछली पालन और कृषि पर नकारात्मक प्रभाव।
जल प्रदूषण के समाधान
- अपशिष्ट उपचार संयंत्र: घर और उद्योग के मलजल और रासायनिक अपशिष्ट को शुद्ध करना। उदाहरण: सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट।
- कानून और नियम लागू करना: जल स्रोतों में औद्योगिक अपशिष्ट का निषेध। उदाहरण: जल (Prevention and Control of Pollution) Act।
- सार्वजनिक जागरूकता: स्वच्छता अभियान और जल संरक्षण के बारे में शिक्षा। उदाहरण: “Swachh Bharat Abhiyan” के अंतर्गत नदी सफाई।
- पुनर्चक्रण (Reuse & Recycling): उपयोग किए पानी का पुनः उपयोग। उदाहरण: फाउंटेन और टॉयलेट फ्लश के लिए पुनः प्रयोग।
- हरित कृषि तकनीक: जैविक उर्वरक और कम रसायन का प्रयोग।
- जल संरक्षण संरचना: वर्षा जल संचयन, जलाशय और तालाब निर्माण।
जल संरक्षण: आवश्यकता और महत्व
जल संरक्षण का अर्थ है जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और उनका संरक्षण ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ भी पर्याप्त जल प्राप्त कर सकें। उदाहरण: वर्षा जल संचयन टैंक।
- आवश्यकता:
- जल संकट और घटते भूजल स्तर।
- बढ़ती जनसंख्या और उद्योगों की बढ़ती जल मांग।
- जलाशयों और नदियों में प्रदूषण।
- महत्व:
- पीने योग्य जल की उपलब्धता।
- कृषि और सिंचाई के लिए जल।
- जलीय जीवन और पारिस्थितिकी संतुलन।
- औद्योगिक और ऊर्जा उत्पादन के लिए जल।
- तरीके:
- टपक सिंचाई (Drip Irrigation)। उदाहरण: खेतों में जल की बचत।
- वर्षा जल संचयन। उदाहरण: घर की छत पर टैंक में वर्षा जल जमा करना।
- जल पुनः उपयोग। उदाहरण: घरेलू अपशिष्ट जल से पौधों की सिंचाई।
- स्मार्ट नल और उपकरण। उदाहरण: समयबद्ध नल और वाटर मीटर।
- अतिरिक्त तथ्य:
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 2.2 अरब लोग अभी भी सुरक्षित जल तक पहुँच नहीं रखते।
- जल संरक्षण से ऊर्जा की बचत भी होती है क्योंकि जल पंपिंग और शुद्धिकरण में ऊर्जा खर्च होती है।
- प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना सबसे प्रभावी तरीका है।