प्रकाश की किरणें
प्रकाश की किरणें वह रास्ते हैं जिन पर प्रकाश सीधे फैलता है। यह सीधी रेखा में चलता है जब तक कि इसे किसी माध्यम या वस्तु द्वारा अवरुद्ध न किया जाए। उदाहरण: सूर्य की किरणें खिड़की से कमरे में प्रवेश करना।
- प्रकृति: प्रकाश विद्युत-चुंबकीय तरंग है और वैक्यूम में भी गति करती है। यह ऊर्जा का रूप है और तरंग और कण दोनों गुण दिखाती है (Wave-Particle Duality)।
- महत्व: दृश्यता (visibility) के लिए आवश्यक, प्रतिबिंब (reflection), अपवर्तन (refraction), और विवर्तन (diffraction) में उपयोगी। उदाहरण: टॉर्च की रोशनी, कैमरे में प्रकाश का प्रतिबिंब।
- गति: प्रकाश की गति लगभग 3 × 10⁸ m/s वैक्यूम में। उदाहरण: अंतरिक्ष में सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश 8 मिनट में पहुँचता है।
समान्तर प्रकाश किरण पुंज
वे किरणें जो समानांतर चलती हैं और न तो आपस में मिलती हैं और न ही फैलती हैं। उदाहरण: लेजर बीम।
- विशेषता: एक समान दूरी बनाए रखती हैं, इनकी दिशा में परिवर्तन नहीं होता।
- उपयोग: लेजर पॉइंटर, प्रोजेक्टर, ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंट्स। उदाहरण: लेजर प्रिंटर और CD रीडर में समान्तर प्रकाश किरणों का उपयोग।
- प्रभाव: समान्तर किरण पुंज की तीव्रता दूरी बढ़ने पर भी लगभग समान रहती है।
अपसारी प्रकाश किरण पुंज
वे किरणें जो किसी बिंदु से बाहर की ओर फैलती हैं। उदाहरण: बल्ब या टॉर्च की रोशनी।
- विशेषता: फैलाव दूरी के साथ बढ़ता है, तीव्रता कम होती है।
- उपयोग: कमरे की सामान्य रोशनी, सड़क लाइट, फ्लड लाइट।
- प्रभाव: किरणों का फैलाव प्रकाश स्रोत की दूरी और आकार पर निर्भर करता है।
अभिसारी प्रकाश किरण पुंज
वे किरणें जो किसी बिंदु की ओर केंद्रित होती हैं। उदाहरण: लेंस द्वारा सूर्य की किरणों को फोकस बिंदु पर केंद्रित करना।
- विशेषता: सभी किरणें एक बिंदु पर मिलती हैं जिसे फोकस बिंदु कहते हैं।
- उपयोग: सौर कुकर, माइक्रोस्कोप, दूरबीन, कैमरे की लेंस प्रणाली।
- प्रभाव: फोकस बिंदु पर ऊर्जा अधिकतम होती है। उदाहरण: लेंस से जलते हुए कागज पर सूर्य की किरणें।
प्रकाश किरणों के अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- प्रकाश की गति अलग-अलग माध्यमों में भिन्न होती है। उदाहरण: हवा में ~343 m/s, पानी में ~225,000 km/s।
- किसी माध्यम की अपवर्तकता के अनुसार किरणें मुड़ती हैं (Refraction)। उदाहरण: पानी में रखा सीधा कांटा मुड़ा दिखाई देना।
- प्रकाश किसी सतह से परावर्तित हो सकता है (Reflection)। उदाहरण: आईने में प्रतिबिंब।
- प्रकाश का विवर्तन (Diffraction) और अपवर्तन (Dispersion) विभिन्न उपकरणों में उपयोग होता है। उदाहरण: प्रिज्म से इंद्रधनुष बनाना।
प्रकाश का परावर्तन
जब प्रकाश किसी सतह से टकराकर वापस लौटता है, उसे परावर्तन कहते हैं। उदाहरण: दर्पण में प्रतिबिम्ब।
- चिकनी सतह से परावर्तन: नियमित परावर्तन, स्पष्ट और समरूप प्रतिबिम्ब बनाता है। उदाहरण: दर्पण, पानी की शांत सतह।
- खुरदुरी सतह से परावर्तन: विसरित परावर्तन, प्रतिबिम्ब धुंधला या विकृत होता है। उदाहरण: कागज, दीवार की सतह।
- महत्व: प्रतिबिंब, ऑप्टिकल उपकरण, प्रकाश मार्ग निर्देशित करना। उदाहरण: कैमरा और लेंस सिस्टम।
परावर्तन के नियम
परावर्तन के दो मुख्य नियम होते हैं:
- पहला नियम: आपतन कोण (∠i) परावर्तन कोण (∠r) के बराबर होता है। उदाहरण: दर्पण में किरण का कोण।
- दूसरा नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण और सतह का सामान्य एक ही तल में होते हैं। उदाहरण: किसी शीशे की सतह पर परावर्तित किरण।
- विशेष महत्व: परावर्तन नियम प्रकाश के प्रतिबिंब, लेंस और दर्पण के डिजाइन में आधारभूत हैं।
समतल दर्पण और प्रतिबिम्ब
समतल दर्पण सपाट सतह वाला दर्पण है जो आभासी, सीधा और वस्तु के आकार का प्रतिबिम्ब बनाता है। उदाहरण: बाथरूम या ड्रेसिंग टेबल का दर्पण।
- विशेषता: प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है और वस्तु से दूरी बराबर होती है।
- उपयोग: ड्रेसिंग, सजावट, सुरक्षा (सुरक्षा कैमरों के लिए)।
- प्रभाव: वस्तु और प्रतिबिम्ब का आकार समान होता है।
पार्श्व परिवर्तन
समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब का दायाँ-बायाँ उलटना। उदाहरण: दर्पण में "AMBULANCE" उलटा दिखना।
- महत्व: एम्बुलेंस और वाहन पर उलटे अक्षर इसलिए लिखे जाते हैं कि सामने वाला चालक दर्पण में सही दिशा में देख सके।
- अन्य उदाहरण: सिग्नल लाइट पर अक्षर या संकेत।
गोलीय दर्पण
गोलाकार सतह वाले दर्पण। उदाहरण: कार के साइड मिरर (उत्तल)।
- प्रकार: अवतल (concave) – अंदर की ओर वक्र, उत्तल (convex) – बाहर की ओर वक्र।
- उपयोग: फोकस बनाना, बड़े क्षेत्र का दृश्य प्राप्त करना, सुरक्षा।
अवतल दर्पण
परावर्तक सतह अंदर की ओर वक्र होती है। उदाहरण: मेकअप दर्पण, टॉर्च।
- प्रतिबिम्ब: वास्तविक (उलटा, प्रक्षेपित) या आभासी (सीधा, बड़ा)।
- उपयोग: टॉर्च की रोशनी केंद्रित करना, दंत चिकित्सक का दर्पण, सौर कुकर।
- विशेष प्रभाव: प्रकाश और ऊर्जा को एक बिंदु पर केंद्रित कर सकता है।
उत्तल दर्पण
परावर्तक सतह बाहर की ओर वक्र होती है। उदाहरण: ट्रैफिक दर्पण, कार का साइड मिरर।
- प्रतिबिम्ब: हमेशा आभासी, सीधा और छोटा।
- उपयोग: वाहनों के साइड मिरर, ट्रैफिक सुरक्षा, दुकानों में निगरानी।
- विशेष प्रभाव: बड़े क्षेत्र का दृश्य प्रदान करता है, विकृत प्रतिबिम्ब सुरक्षा में मदद करता है।
गोलीय दर्पण के भाग
- फोकस (F): वह बिंदु जहाँ समान्तर किरणें परावर्तन के बाद मिलती हैं (अवतल) या प्रतीत होती हैं (उत्तल)। उदाहरण: सौर कुकर में बर्तन।
- वक्रता केन्द्र (C): गोले का केंद्र जिसका हिस्सा दर्पण है।
- वक्रता त्रिज्या (R): वक्रता केंद्र और दर्पण के बीच की दूरी।
- ध्रुव (P): दर्पण का मध्य बिंदु।
- मुख्य अक्ष: वक्रता केंद्र और ध्रुव को जोड़ने वाली रेखा।
वास्तविक और आभासी प्रतिबिम्ब
वास्तविक प्रतिबिम्ब: वह प्रतिबिम्ब जो स्क्रीन पर प्रक्षेपित हो सकता है, उलटा होता है। उदाहरण: प्रोजेक्टर की छवि।
आभासी प्रतिबिम्ब: वह प्रतिबिम्ब जो स्क्रीन पर प्रक्षेपित नहीं हो सकता, सीधा होता है। उदाहरण: समतल दर्पण की छवि, उत्तल दर्पण का प्रतिबिम्ब।
गोलीय दर्पण का दैनिक जीवन में उपयोग
- अवतल दर्पण: टॉर्च और हेडलाइट में प्रकाश केंद्रित करना, दंत चिकित्सक, सौर कुकर, माइक्रोस्कोप में। उदाहरण: हेडलाइट का फोकसेड बीम।
- उत्तल दर्पण: वाहनों के साइड मिरर, ट्रैफिक चौराहों पर सुरक्षा दर्पण, दुकानों में निगरानी। उदाहरण: कार का साइड मिरर, सिक्योरिटी मिरर।
परावर्तन के अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- परावर्तक सतह जितनी चिकनी होगी, प्रतिबिंब उतना स्पष्ट होगा।
- दर्पण का आकार और वक्रता प्रतिबिंब की दूरी और आकार को प्रभावित करती है।
- अवतल दर्पण प्रकाश और ऊर्जा को केंद्रित कर सकता है, उत्तल दर्पण बड़े क्षेत्र का दृश्य प्रदान करता है।
- प्रकाशीय उपकरणों जैसे टेलीस्कोप, कैमरा, लाइटिंग सिस्टम में परावर्तन नियम का प्रयोग होता है।