यह अध्याय परिमेय संख्याओं की मूल अवधारणाओं पर केंद्रित है। परिमेय संख्याएँ भिन्नों के रूप में व्यक्त की जा सकती हैं और गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हम परिमेय संख्याओं की अवधारणा, दो क्रमागत पूर्णांकों के मध्य परिमेय संख्याएँ, समतुल्य परिमेय संख्याएँ, और उनके क्रम के बारे में सीखेंगे।
विस्तृत अवधारणाएँ
1. परिमेय संख्याओं की अवधारणा
परिमेय संख्या वह संख्या है जो \( \frac{p}{q} \) के रूप में लिखी जा सकती है, जहाँ \( p \) और \( q \) पूर्णांक हैं और \( q \neq 0 \)。 परिमेय संख्याएँ पूर्णांक, भिन्न, और दशमलव संख्याएँ (जो परिमित या आवर्ती हों) शामिल करती हैं।
उदाहरण: \( \frac{1}{2}, -\frac{3}{4}, 5, -7 \)
पूर्णांक परिमेय संख्याएँ हैं क्योंकि उन्हें \( \frac{p}{1} \) के रूप में लिखा जा सकता है।
उदाहरण 1:
क्या \( \frac{4}{5} \) एक परिमेय संख्या है?
\( \frac{4}{5} \) में \( p = 4 \), \( q = 5 \), दोनों पूर्णांक हैं और \( q \neq 0 \)。
अतः, \( \frac{4}{5} \) एक परिमेय संख्या है। उत्तर: हाँ, परिमेय संख्या।
उदाहरण 2:
क्या \( -3 \) एक परिमेय संख्या है?
\( -3 \) को \( \frac{-3}{1} \) के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ \( p = -3 \), \( q = 1 \), और \( q \neq 0 \)。
अतः, \( -3 \) एक परिमेय संख्या है। उत्तर: हाँ, परिमेय संख्या।
2. दो क्रमागत पूर्णांकों के मध्य में परिमेय संख्याएँ
दो क्रमागत पूर्णांकों (जैसे 1 और 2) के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं। इन्हें खोजने के लिए, हम औसत विधि या भिन्नों का उपयोग कर सकते हैं।
औसत विधि: \( \frac{a + b}{2} \), जहाँ \( a \) और \( b \) क्रमागत पूर्णांक हैं।
भिन्न विधि: संख्याओं को भिन्न के रूप में लिखकर उनके बीच नई भिन्न बनाना।
उदाहरण 1:
2 और 3 के बीच एक परिमेय संख्या ज्ञात करें।
औसत विधि: \( \frac{2 + 3}{2} = \frac{5}{2} \)
\( \frac{5}{2} = 2.5 \), जो 2 और 3 के बीच है। उत्तर: \( \frac{5}{2} \)。
उदाहरण 2:
1 और 2 के बीच तीन परिमेय संख्याएँ ज्ञात करें।
1 और 2 को भिन्न के रूप में लिखें: \( \frac{1}{1}, \frac{2}{1} \)
हर को 4 से गुणा करें: \( \frac{4}{4}, \frac{8}{4} \)
बीच की संख्याएँ: \( \frac{5}{4}, \frac{6}{4}, \frac{7}{4} \) उत्तर: \( \frac{5}{4}, \frac{3}{2}, \frac{7}{4} \)。
3. समतुल्य परिमेय संख्याएँ
समतुल्य परिमेय संख्याएँ वे भिन्नें हैं जो मान में समान होती हैं, लेकिन उनके अंश और हर अलग होते हैं। इन्हें अंश और हर को एक ही संख्या से गुणा या भाग करके प्राप्त किया जाता है।