स्टॉकहोम, स्वीडन – वर्ष 2025 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को प्रदान किया गया है जिन्होंने धातु-कार्बनिक ढांचे (Metal–Organic Frameworks – MOFs) के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई। विजेता हैं – सुसुमु कितागावा (जापान), रिचर्ड रॉब्सन (ऑस्ट्रेलिया) और उमर एम. याघी (अमेरिका)।
इनकी 1989 से शुरू हुई अनुसंधान यात्रा ने सामग्री विज्ञान (Material Science) को एक नई दिशा दी। इनके कार्यों ने दिखाया कि परमाणु और अणुओं को व्यवस्थित रूप से जोड़कर ऐसी सामग्रियाँ बनाई जा सकती हैं जो हल्की, मजबूत, और अत्यंत छिद्रयुक्त (porous) हों।
सुसुमु कितागावा
आयु: 74 वर्ष
क्योटो विश्वविद्यालय, जापान
विशेषज्ञता:
कोऑर्डिनेशन केमिस्ट्री
रिचर्ड रॉब्सन
आयु: 88 वर्ष
मेलबर्न विश्वविद्यालय, ऑस्ट्रेलिया
विशेषज्ञता:
अकार्बनिक संरचना रसायन
उमर एम. याघी
आयु: 60 वर्ष
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले,
अमेरिका
विशेषज्ञता: रेटिकुलर केमिस्ट्री (Reticular Chemistry)
नोबेल समिति ने घोषणा की कि इन वैज्ञानिकों ने स्वतंत्र रूप से कार्य करते हुए एक नई श्रेणी की सामग्रियों — धातु-कार्बनिक ढांचे (MOFs) — का विकास किया। इन ढांचों में धातु आयन और कार्बनिक अणु मिलकर त्रि-आयामी नेटवर्क बनाते हैं।
MOF संरचनाओं को ऐसे समझा जा सकता है जैसे घर की दीवारें ईंटों और सीमेंट से जुड़ी हों – यहाँ "ईंटें" धातु आयन हैं और "सीमेंट" कार्बनिक लिगैंड। इनकी विशेषता है कि ये अत्यंत छिद्रयुक्त होती हैं, यानी इनके अंदर गैसों या तरल पदार्थों को अवशोषित करने के लिए विशाल आंतरिक स्थान होता है।
यह खोज ऊर्जा, पर्यावरण और औद्योगिक अनुप्रयोगों में क्रांतिकारी साबित हुई है। MOF की कुछ संरचनाएँ अपने भार की तुलना में 10 गुना अधिक गैस अवशोषित कर सकती हैं।
"धातु-कार्बनिक ढांचे विज्ञान की सबसे रोमांचक सामग्रियों में से एक हैं — ये छोटे आकार में विशाल आंतरिक सतह क्षेत्र प्रदान करते हैं," – हेनर लिंके, रसायन विज्ञान नोबेल समिति अध्यक्ष।
इन तीनों वैज्ञानिकों ने रेटिकुलर केमिस्ट्री (Reticular Chemistry) की नींव रखी — यह वह प्रक्रिया है जिसमें परमाणुओं को व्यवस्थित रूप से जोड़कर ठोस ढांचे बनाए जाते हैं।
MOF का सतह क्षेत्र इतना अधिक होता है कि एक ग्राम MOF की आंतरिक सतह एक फुटबॉल मैदान से भी बड़ी हो सकती है। इस कारण यह गैस भंडारण और प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में अत्यधिक उपयोगी है।
स्रोत: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज, नोबेल प्राइज 2025 आधिकारिक घोषणा, एवं अंतरराष्ट्रीय विज्ञान समाचार एजेंसियाँ।