वायु की गतियाँ

विस्तृत नोट्स

परिचय

वायु की गतियाँ वायुमण्डल में हवाओं के प्रवाह को दर्शाती हैं, जो वायुदाब, तापमान, और पृथ्वी के घूर्णन से प्रभावित होती हैं। ये गतियाँ मौसम, जलवायु, और मानव जीवन को प्रभावित करती हैं। पवनें स्थायी और अस्थायी होती हैं, और चक्रवात जैसी घटनाएँ वायु की गतियों का परिणाम हैं।

पवन वायु की वह क्षैतिज गति है जो पृथ्वी की सतह के समानांतर चलती है। यह गति मुख्यतः उच्च वायुदाब क्षेत्र से निम्न वायुदाब क्षेत्र की ओर होती है। वायुदाब में अंतर जितना अधिक होता है, पवन की गति उतनी ही तेज होती है।

पवन उत्पन्न होने के कारण:

  • पृथ्वी के विभिन्न भागों में असमान तापमान
  • तापमान में अंतर के कारण वायुदाब में अंतर उत्पन्न होना।
  • पृथ्वी का घूर्णन (कोरिऑलिस बल), जिससे पवन की दिशा मुड़ जाती है।
  • स्थल और जल की ऊष्मा ग्रहण करने की क्षमता में अंतर।

पवन की प्रमुख विशेषताएँ:

  • पवन की दिशा और गति वायुदाब प्रवणता (Pressure Gradient) पर निर्भर करती है।
  • पवन मौसम और जलवायु को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • पवन तापमान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाकर ताप संतुलन बनाए रखती है।
  • तेज पवनें आंधी, तूफान, चक्रवात आदि का कारण बन सकती हैं।

पवन मापन के उपकरण:

  • पवन की दिशा मापने के लिए – वायुदिशा सूचक (Wind Vane)
  • पवन की गति मापने के लिए – एनीमोमीटर (Anemometer)

पवन के प्रकार:

  • स्थायी पवनें – जैसे व्यापारिक पवनें, पश्चिमी पवनें।
  • मौसमी पवनें – जैसे मानसून पवनें।
  • स्थानीय पवनें – जैसे लू, चिनूक, फोएन।

भारत से उदाहरण:

मानसून पवनें भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। ये पवनें जून से सितंबर के बीच भारी वर्षा लाकर खरीफ फसलों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करती हैं।

विश्व से उदाहरण:

व्यापारिक पवनें (Trade Winds) भूमध्य रेखा के दोनों ओर चलती हैं और प्राचीन काल से ही समुद्री व्यापार तथा नौकायन में सहायक रही हैं, विशेष रूप से अटलांटिक और कैरेबियन क्षेत्रों में।

परीक्षा उपयोगी बिंदु:

  • पवन सदैव उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती है।
  • पवन की गति वायुदाब अंतर के अनुपात में होती है।
  • मानसून पवनें मौसमी पवनों का प्रमुख उदाहरण हैं।

कोरोलियस बल (Coriolis Force)

कोरोलियस बल पृथ्वी के घूर्णन (Rotation) के कारण उत्पन्न होने वाला एक काल्पनिक बल है, जो पृथ्वी की सतह पर गतिशील वस्तुओं (जैसे पवनें, महासागरीय धाराएँ, मिसाइल, विमान आदि) की गति की दिशा में विचलन उत्पन्न करता है। यह बल वस्तु की गति की दिशा बदलता है, उसकी गति को न तो बढ़ाता है और न ही घटाता है।

कोरोलियस बल की उत्पत्ति:

  • पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है।
  • विषुवत रेखा पर पृथ्वी की घूर्णन गति अधिक तथा ध्रुवों पर न्यूनतम होती है।
  • जब कोई वायु द्रव्यमान एक अक्षांश से दूसरे अक्षांश की ओर जाता है, तो वह पृथ्वी की अलग-अलग घूर्णन गति के कारण मुड़ जाता है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • यह एक काल्पनिक बल है, वास्तविक नहीं।
  • उत्तरी गोलार्ध में गतिशील वस्तुएँ दाईं ओर मुड़ती हैं।
  • दक्षिणी गोलार्ध में गतिशील वस्तुएँ बाईं ओर मुड़ती हैं।
  • विषुवत रेखा पर कोरोलियस बल शून्य होता है।
  • ध्रुवों की ओर जाते हुए इसका प्रभाव अधिकतम हो जाता है।

पवनों और महासागरों पर प्रभाव:

  • व्यापारिक, पछुआ और ध्रुवीय पवनों की दिशा निर्धारित करता है।
  • महासागरीय धाराओं के मोड़ और घूर्णन में सहायक।
  • चक्रवात एवं प्रतिचक्रवात की घूर्णन दिशा नियंत्रित करता है।

भारत से उदाहरण:

दक्षिण-पश्चिम मानसून पवनें हिन्द महासागर से भारत की ओर आते समय कोरोलियस बल के कारण दाईं ओर मुड़ जाती हैं, जिससे भारत में व्यापक वर्षा होती है।

विश्व से उदाहरण:

अटलांटिक महासागर में उत्पन्न हरीकेन उत्तरी गोलार्ध में घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में घूमते हैं।

परीक्षा उपयोगी तथ्य:

  • कोरोलियस बल = पृथ्वी का घूर्णन + गतिशील वस्तु।
  • विषुवत पर चक्रवात नहीं बनते।

विक्षेपण (Deflection)

विक्षेपण वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी के घूर्णन के कारण पवनों, महासागरीय धाराओं तथा चक्रवातों की दिशा सीधी न होकर मुड़ जाती है। यह विक्षेपण कोरोलियस बल का प्रत्यक्ष परिणाम है।

विक्षेपण के कारण:

  • पृथ्वी का घूर्णन।
  • अक्षांश में परिवर्तन।
  • वायु की गति और दिशा।

मुख्य विशेषताएँ:

  • विक्षेपण का कारण कोरोलियस बल है।
  • उत्तरी गोलार्ध में सभी गतिशील हवाएँ दाईं ओर विक्षेपित होती हैं।
  • दक्षिणी गोलार्ध में हवाएँ बाईं ओर विक्षेपित होती हैं।
  • विषुवत रेखा पर विक्षेपण नहीं होता।

चक्रवातों पर प्रभाव:

  • उत्तरी गोलार्ध में चक्रवात वामावर्त (Anticlockwise) घूमते हैं।
  • दक्षिणी गोलार्ध में चक्रवात दक्षिणावर्त (Clockwise) घूमते हैं।
  • इसी कारण दोनों गोलार्धों में चक्रवातों की संरचना भिन्न होती है।

भारत से उदाहरण:

बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न चक्रवात सामान्यतः उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर मुड़ते हुए ओडिशा या पश्चिम बंगाल तट से टकराते हैं।

विश्व से उदाहरण:

ऑस्ट्रेलिया के आसपास बनने वाले चक्रवात दक्षिणी गोलार्ध में होने के कारण बाईं ओर विक्षेपित होते हैं।

कोरोलियस बल और विक्षेपण में अंतर:

  • कोरोलियस बल कारण है, विक्षेपण उसका परिणाम।
  • कोरोलियस बल एक बल है, विक्षेपण एक प्रक्रिया।

परीक्षा उपयोगी निष्कर्ष:

  • विक्षेपण के बिना वैश्विक पवन तंत्र संभव नहीं।
  • चक्रवात की दिशा समझने में विक्षेपण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पवन के प्रकार (Types of Winds)

पवनों को उनकी दिशा, अवधि, क्षेत्रीय विस्तार और नियमितता के आधार पर विभिन्न वर्गों में विभाजित किया जाता है। पृथ्वी पर सभी पवनें वायुदाब के अंतर के कारण चलती हैं, किंतु उनका स्वरूप और प्रभाव भिन्न-भिन्न होता है।

पवनों का वर्गीकरण:

भूगोल में पवनों को मुख्यतः तीन प्रमुख वर्गों में बाँटा जाता है—

  • स्थायी (नियतवाही) पवनें
  • अस्थायी / मौसमी (अनियतवाही) पवनें
  • स्थानीय पवनें

1. स्थायी (नियतवाही) पवनें

स्थायी पवनें वे पवनें हैं जो वर्ष भर एक निश्चित दिशा में बहती हैं। इनका निर्माण पृथ्वी की वैश्विक वायुदाब पेटियों के कारण होता है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • इनकी दिशा लगभग स्थिर रहती है।
  • ये विशाल क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं।
  • वैश्विक जलवायु संतुलन बनाए रखने में सहायक।

स्थायी पवनों के प्रकार:

  • व्यापारिक पवनें (Trade Winds)
  • पछुआ पवनें (Westerlies)
  • ध्रुवीय पवनें (Polar Winds)

भारत से उदाहरण:

व्यापारिक पवनें ग्रीष्मकाल में दिशा बदलकर दक्षिण-पश्चिम मानसून का रूप ले लेती हैं।

2. अस्थायी / मौसमी (अनियतवाही) पवनें

अस्थायी पवनें वे पवनें हैं जिनकी दिशा और गति मौसम के अनुसार बदलती रहती है। इनका प्रभाव किसी विशेष समय या ऋतु में अधिक होता है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • इनकी दिशा निश्चित नहीं होती।
  • ऋतु परिवर्तन के साथ दिशा बदलती हैं।
  • कृषि और वर्षा पर गहरा प्रभाव।

प्रमुख प्रकार:

  • मानसूनी पवनें
  • समीर (स्थलीय एवं सागरीय)

भारत से उदाहरण:

भारत की संपूर्ण जलवायु मानसूनी पवनों पर आधारित है, जो ग्रीष्म और शीत ऋतु में दिशा बदलती हैं।

3. स्थानीय पवनें

स्थानीय पवनें वे पवनें हैं जो छोटे क्षेत्रों में स्थानीय तापमान और वायुदाब के अंतर के कारण चलती हैं। इनका प्रभाव सीमित क्षेत्र तक ही रहता है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • सीमित क्षेत्र में प्रभावी।
  • कम समय के लिए चलती हैं।
  • स्थानीय जीवन और स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

स्थानीय पवनों के उदाहरण:

  • लू – उत्तर भारत की गर्म और शुष्क पवन।
  • चिनूक – उत्तरी अमेरिका की गर्म पवन।
  • सिरोको – सहारा मरुस्थल से चलने वाली गर्म पवन।
  • बोरा – यूरोप की ठंडी पवन।

भारत से उदाहरण:

ग्रीष्म ऋतु में उत्तर भारत में चलने वाली लू स्थानीय पवन का प्रमुख उदाहरण है।

परीक्षा उपयोगी सार:

  • स्थायी पवनें – वर्ष भर, निश्चित दिशा।
  • अस्थायी पवनें – ऋतु पर निर्भर।
  • स्थानीय पवनें – सीमित क्षेत्र में प्रभावी।
  • भारत की जलवायु का आधार – मानसूनी पवनें।

समीर (Land Breeze & Sea Breeze)

समीर वे दैनिक (दिवा–रात्रि) पवनें हैं जो स्थल और समुद्र के तापमान में अंतर के कारण उत्पन्न होती हैं। स्थल और जल की ऊष्मा ग्रहण तथा त्याग करने की क्षमता अलग-अलग होने के कारण दिन और रात में वायुदाब की स्थिति बदलती रहती है, जिससे समीर चलती हैं।

समीर उत्पन्न होने का कारण:

  • स्थल भूमि का समुद्र की तुलना में शीघ्र गर्म होना।
  • स्थल भूमि का समुद्र की तुलना में शीघ्र ठंडा होना।
  • तापमान अंतर के कारण वायुदाब में अंतर उत्पन्न होना।

समीर के प्रकार:

  • सागरीय समीर (Sea Breeze):
    • दिन के समय चलती है।
    • समुद्र से स्थल की ओर बहती है।
    • दिन में स्थल गर्म होकर निम्न वायुदाब क्षेत्र बनाता है, जबकि समुद्र अपेक्षाकृत ठंडा रहकर उच्च वायुदाब क्षेत्र बनाता है।
  • स्थलीय समीर (Land Breeze):
    • रात के समय चलती है।
    • स्थल से समुद्र की ओर बहती है।
    • रात में स्थल शीघ्र ठंडा होकर उच्च वायुदाब क्षेत्र बनाता है, जबकि समुद्र अपेक्षाकृत गर्म रहकर निम्न वायुदाब क्षेत्र बनाता है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • समीर की दिशा दिन और रात में बदल जाती है
  • ये मुख्यतः तटीय क्षेत्रों में प्रभावी होती हैं।
  • इनकी गति सामान्यतः मंद होती है।
  • तटीय क्षेत्रों के तापमान को संतुलित बनाए रखती हैं।

जलवायु पर प्रभाव:

  • दिन में सागरीय समीर तापमान को कम कर देती है।
  • रात में स्थलीय समीर समुद्र की ओर बहकर मौसम को शुष्क बनाती है।
  • तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी या सर्दी नहीं पड़ने देती।

भारत से उदाहरण:

गोवा, मुंबई, चेन्नई जैसे तटीय क्षेत्रों में दिन के समय चलने वाली सागरीय समीर गर्मी को कम कर देती है और मौसम को सुहावना बनाती है।

विश्व से उदाहरण:

संयुक्त राज्य अमेरिका के मियामी जैसे तटीय शहरों में सागरीय समीर के कारण दिन का तापमान नियंत्रित रहता है।

परीक्षा उपयोगी बिंदु:

  • समीर = दैनिक पवनें।
  • सागरीय समीर → दिन में → समुद्र से स्थल।
  • स्थलीय समीर → रात में → स्थल से समुद्र।
  • तटीय जलवायु के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका।

चक्रवात एवं प्रतिचक्रवात (Cyclone & Anticyclone)

चक्रवात (Cyclone)

चक्रवात वह वायुमंडलीय तंत्र है जिसमें निम्न वायुदाब के केंद्र के चारों ओर पवनें तेजी से घूमती हुई केंद्र की ओर अभिसरित होती हैं। चक्रवात प्रायः बादल, वर्षा, तेज हवाएँ और तूफानी मौसम लेकर आते हैं।

चक्रवात की उत्पत्ति के कारण:

  • अत्यधिक निम्न वायुदाब का निर्माण।
  • गरम व आर्द्र वायु का ऊपर उठना।
  • कोरोलियस बल का प्रभाव।
  • समुद्र की सतह का तापमान 26.5°C से अधिक होना (उष्णकटिबंधीय चक्रवात में)।

घूर्णन दिशा:

  • उत्तरी गोलार्ध → वामावर्त (घड़ी की सुई के विपरीत)
  • दक्षिणी गोलार्ध → दक्षिणावर्त (घड़ी की सुई की दिशा में)

चक्रवात के प्रकार:

  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात:
    • गर्म महासागरों पर उत्पन्न होते हैं।
    • अत्यधिक वर्षा, तेज हवाएँ और समुद्री ज्वार लाते हैं।
  • शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात:
    • मध्य अक्षांशों में उत्पन्न होते हैं।
    • फ्रंट (ठंडा व गर्म) से संबंधित होते हैं।

भारत से प्रमुख उदाहरण:

  • चक्रवात अम्फान – बंगाल की खाड़ी।
  • चक्रवात फानी – ओडिशा तट।
  • चक्रवात निसर्ग – महाराष्ट्र तट।

विश्व से प्रमुख उदाहरण:

  • हरीकेन कैटरीना – अटलांटिक महासागर (USA)।
  • टाइफून हाययान – फिलीपींस।
  • टाइफून टिप – प्रशांत महासागर।

चक्रवात का प्रभाव:

  • भारी वर्षा और बाढ़।
  • तेज हवाओं से संपत्ति और फसलों की क्षति।
  • समुद्री जलस्तर में वृद्धि (Storm Surge)।

प्रतिचक्रवात (Anticyclone)

प्रतिचक्रवात वह वायुमंडलीय तंत्र है जिसमें उच्च वायुदाब के केंद्र से पवनें चारों ओर बाहर की ओर अपसारित होती हैं। यह सामान्यतः स्वच्छ, शुष्क और स्थिर मौसम से संबंधित होता है।

प्रतिचक्रवात की उत्पत्ति:

  • ठंडी और भारी वायु का नीचे की ओर अवरोहण।
  • उच्च वायुदाब का निर्माण।
  • कोरोलियस बल का प्रभाव।

घूर्णन दिशा:

  • उत्तरी गोलार्ध → दक्षिणावर्त
  • दक्षिणी गोलार्ध → वामावर्त

मुख्य विशेषताएँ:

  • मौसम साफ और शुष्क रहता है।
  • बादल और वर्षा की संभावना कम।
  • लंबे समय तक स्थिर रह सकता है।

भारत से प्रमुख उदाहरण:

  • शीत ऋतु में उत्तर भारत पर बना स्थलीय उच्च वायुदाब
  • राजस्थान एवं उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन प्रतिचक्रवात।

विश्व से प्रमुख उदाहरण:

  • सहारा मरुस्थल का स्थायी उच्च वायुदाब क्षेत्र।
  • ऑस्ट्रेलिया का उपोष्ण उच्च वायुदाब क्षेत्र।

प्रतिचक्रवात का प्रभाव:

  • स्पष्ट आकाश और धूप।
  • शीत ऋतु में पाला पड़ने की संभावना।
  • गर्मी में हीट वेव की स्थिति।

चक्रवात एवं प्रतिचक्रवात में अंतर (परीक्षा उपयोगी)

  • चक्रवात → निम्न वायुदाब → खराब मौसम।
  • प्रतिचक्रवात → उच्च वायुदाब → साफ मौसम।
  • चक्रवात में हवाएँ केंद्र की ओर, प्रतिचक्रवात में बाहर की ओर।
  • चक्रवात अल्पकालिक, प्रतिचक्रवात दीर्घकालिक हो सकता है।

प्रमुख चक्रवात एवं प्रतिचक्रवात – नाम व तिथि (Exam-Oriented Notes)

भारत एवं आसपास के क्षेत्र के प्रमुख चक्रवात

  • अम्फान (Amphan) – 16–21 मई 2020 (बंगाल की खाड़ी)
  • फानी (Fani) – 26 अप्रैल–4 मई 2019 (ओडिशा तट)
  • निसर्ग (Nisarga) – 1–4 जून 2020 (महाराष्ट्र तट)
  • तौकते (Tauktae) – 14–19 मई 2021 (अरब सागर)
  • यास (Yaas) – 23–28 मई 2021 (बंगाल की खाड़ी)
  • ओखी (Ockhi) – 29 नवम्बर–6 दिसम्बर 2017 (अरब सागर)
  • मोचा (Mocha) – 11–15 मई 2023 (बंगाल की खाड़ी)

विश्व के प्रमुख उष्णकटिबंधीय चक्रवात (नाम व तिथि)

(क) अटलांटिक महासागर – Hurricane

  • हरीकेन कैटरीना (Katrina) – 23–31 अगस्त 2005
  • हरीकेन सैंडी (Sandy) – 22–31 अक्टूबर 2012
  • हरीकेन हार्वे (Harvey) – 17 अगस्त–3 सितम्बर 2017
  • हरीकेन इरमा (Irma) – 30 अगस्त–13 सितम्बर 2017

(ख) प्रशांत महासागर – Typhoon

  • टाइफून हाययान (Haiyan) – 3–11 नवम्बर 2013
  • टाइफून टिप (Tip) – 4–19 अक्टूबर 1979
  • टाइफून नोरू (Noru) – 19 सितम्बर–3 अक्टूबर 2022
  • टाइफून मांगखुत (Mangkhut) – 7–17 सितम्बर 2018

(ग) हिंद महासागर – Cyclone

  • चक्रवात इदाई (Idai) – 4–21 मार्च 2019
  • चक्रवात केनेथ (Kenneth) – 21–29 अप्रैल 2019
  • चक्रवात गाती (Gati) – 21–24 नवम्बर 2020

(घ) ऑस्ट्रेलिया क्षेत्र – Willy-willy

  • विली-विली ट्रेसी (Tracy) – 21–26 दिसम्बर 1974
  • विली-विली डेबी (Debbie) – 23–31 मार्च 2017

प्रमुख प्रतिचक्रवात (उच्च वायुदाब क्षेत्र)

भारत में प्रमुख प्रतिचक्रवात

  • उत्तर-पश्चिम भारत का शीतकालीन प्रतिचक्रवात – दिसम्बर से फरवरी
  • राजस्थान क्षेत्र का उच्च वायुदाब – शीत ऋतु में

विश्व के प्रमुख स्थायी प्रतिचक्रवात

  • अज़ोर्स उच्च दाब – वर्ष भर (अटलांटिक महासागर)
  • हवाई उच्च दाब – वर्ष भर (प्रशांत महासागर)
  • सहारा उच्च दाब – मुख्यतः ग्रीष्म ऋतु
  • ऑस्ट्रेलियाई उपोष्ण उच्च दाब – वर्ष भर

परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य

  • चक्रवातों की तिथि प्रायः उनके निर्माण से क्षय की अवधि दर्शाती है।
  • प्रतिचक्रवात किसी एक दिन नहीं बल्कि ऋतु या वर्ष भर बने रहते हैं।
  • भारत में अधिकतर चक्रवात अप्रैल–जून और अक्टूबर–नवम्बर में आते हैं।

सारांश (एक पंक्ति के तथ्य)

    • वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर गैसों का आवरण है।
    • वायुमंडल में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड एवं जलवाष्प पाई जाती है।
    • वायुदाब का अर्थ है किसी स्थान पर वायु द्वारा डाला गया दबाव।
    • वायुदाब तापमान और ऊँचाई के साथ घटता-बढ़ता है।
    • उच्च तापमान पर वायु हल्की होकर ऊपर उठती है।
    • निम्न तापमान पर वायु भारी होकर नीचे बैठती है।
    • पवन वायु की क्षैतिज गति को कहते हैं।
    • पवन सदैव उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर बहती है।
    • तापमान में अंतर वायुदाब में अंतर उत्पन्न करता है।
    • पृथ्वी का घूर्णन पवनों की दिशा को प्रभावित करता है।
    • पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न बल को कोरोलियस बल कहते हैं।
    • कोरोलियस बल पवनों को सीधी दिशा में नहीं बहने देता।
    • उत्तरी गोलार्ध में पवनें दाईं ओर मुड़ती हैं।
    • दक्षिणी गोलार्ध में पवनें बाईं ओर मुड़ती हैं।
    • विषुवत रेखा पर कोरोलियस बल शून्य होता है।
    • पवनों को स्थायी, अस्थायी और स्थानीय पवनों में बाँटा जाता है।
    • स्थायी पवनें वर्ष भर एक ही दिशा में बहती हैं।
    • व्यापारिक पवनें उपोष्ण उच्च दाब से विषुवतीय निम्न दाब की ओर बहती हैं।
    • व्यापारिक पवनें पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं।
    • पछुआ पवनें पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं।
    • पछुआ पवनें शीतोष्ण कटिबंध में प्रभावी होती हैं।
    • ध्रुवीय पवनें ध्रुवों से उपध्रुवीय क्षेत्रों की ओर बहती हैं।
    • ध्रुवीय पवनें अत्यधिक ठंडी होती हैं।
    • अस्थायी पवनों में मानसूनी पवनें शामिल हैं।
    • मानसूनी पवनें ऋतु के अनुसार दिशा बदलती हैं।
    • ग्रीष्मकालीन मानसून समुद्र से स्थल की ओर बहता है।
    • ग्रीष्मकालीन मानसून भारत में अधिकांश वर्षा करता है।
    • शीतकालीन मानसून स्थल से समुद्र की ओर बहता है।
    • स्थानीय पवनें सीमित क्षेत्र में चलती हैं।
    • स्थानीय पवनें तापमान के स्थानीय अंतर से उत्पन्न होती हैं।
    • लू उत्तर भारत की गर्म एवं शुष्क पवन है।
    • चिनूक गर्म पर्वतीय पवन का उदाहरण है।
    • समीर दैनिक पवनें होती हैं।
    • सागरीय समीर दिन में समुद्र से स्थल की ओर बहती है।
    • स्थलीय समीर रात में स्थल से समुद्र की ओर बहती है।
    • चक्रवात निम्न वायुदाब का क्षेत्र होता है।
    • चक्रवात में पवनें केंद्र की ओर बहती हैं।
    • उत्तरी गोलार्ध में चक्रवात वामावर्त घूमते हैं।
    • दक्षिणी गोलार्ध में चक्रवात दक्षिणावर्त घूमते हैं।
    • उष्णकटिबंधीय चक्रवात महासागरों पर बनते हैं।
    • उष्णकटिबंधीय चक्रवात भारी वर्षा और तेज हवाएँ लाते हैं।
    • शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात मध्य अक्षांशों में बनते हैं।
    • प्रतिचक्रवात उच्च वायुदाब का क्षेत्र होता है।
    • प्रतिचक्रवात में मौसम सामान्यतः साफ रहता है।
    • पवन की गति एनीमोमीटर से मापी जाती है।
    • पवन की दिशा पवनदर्शक यंत्र से मापी जाती है।
    • मानसून भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. पवन क्या है?





2. भारत में पवन का उदाहरण क्या है?





3. विश्व में पवन का उदाहरण क्या है?





4. कोरोलियस बल क्या है?





5. भारत में कोरोलियस बल का उदाहरण क्या है?





6. विश्व में विक्षेपण का उदाहरण क्या है?





7. स्थायी पवनें कौन सी हैं?





8. भारत में व्यापारिक पवन का प्रभाव क्या है?





9. विश्व में पछुआ पवन का उदाहरण क्या है?





10. भारत में ध्रुवीय पवन का उदाहरण क्या है?





11. विश्व में ध्रुवीय पवन का उदाहरण क्या है?





12. अस्थायी पवनें कौन सी हैं?





13. भारत में ग्रीष्मकालीन मॉनसून का प्रभाव क्या है?





14. विश्व में मानसूनी पवन का उदाहरण क्या है?





15. भारत में स्थानीय पवन का उदाहरण क्या है?





16. विश्व में स्थानीय पवन का उदाहरण क्या है?





17. सागरीय समीर कब बहती है?





18. भारत में सागरीय समीर का उदाहरण क्या है?





19. विश्व में सागरीय समीर का उदाहरण क्या है?





20. उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की विशेषता क्या है?





21. भारत में उष्ण कटिबंधीय चक्रवात का उदाहरण क्या है?





22. विश्व में उष्ण कटिबंधीय चक्रवात का उदाहरण क्या है?





23. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात कहाँ होते हैं?





24. भारत में चक्रवात से बचाव का उदाहरण क्या है?





25. विश्व में चक्रवात से बचाव का उदाहरण क्या है?





26. पवन की गति को किससे मापा जाता है?





27. कोरोलियस बल कहाँ न्यूनतम होता है?





28. व्यापारिक पवनें किस दिशा में बहती हैं?





29. पछुआ पवनें किस क्षेत्र में प्रभावी हैं?





30. चक्रवात से बचाव में क्या महत्वपूर्ण है?