परिचय
भारत का भौतिक स्वरूप विविधतापूर्ण है, जिसमें ऊँचे पर्वत, उपजाऊ मैदान, शुष्क मरुस्थल, पठारी क्षेत्र, और तटीय मैदान व द्वीपसमूह शामिल हैं। इसे पाँच प्रमुख भौतिक विभागों में बाँटा गया है: उत्तर का पर्वतीय भाग, उत्तर का मैदानी भाग, थार का मरुस्थल, दक्षिण का पठारी भाग, और तटीय मैदान व द्वीपसमूह।
1. उत्तर का पर्वतीय भाग
उत्तर का पर्वतीय भाग भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित हिमालय पर्वत श्रृंखला है, जो पश्चिम में जम्मू-कश्मीर से पूरब में अरुणाचल प्रदेश तक फैली है।विशेषताएँ:
- हिमालय की उत्पत्ति टेथीज सागर की तलहटी में अवसादों के संचय और भूगर्भीय हलचल से हुई।
- यह तीन समानांतर श्रृंखलाओं में बँटा है: ट्रांस हिमालय, हिमाद्रि, हिमाचल, और शिवालिक।
- ट्रांस हिमालय: हिमालय के उत्तर में स्थित, जैसे कराकोरम और लद्दाख श्रृंखलाएँ।
- हिमाद्रि (वृहद हिमालय): सबसे उत्तरी और ऊँची श्रृंखला, जिसमें माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) शामिल है।
- हिमाचल (मध्य हिमालय): हिमाद्रि के दक्षिण में, पर्यटक स्थल जैसे श्रीनगर, शिमला, और नैनीताल।
- शिवालिक (उपहिमालय): सबसे दक्षिणी, कम ऊँचाई वाली श्रृंखला, घने वनों से युक्त।
लाभ:
- हिमालय भारत को बाहरी आक्रमणों से बचाता है।
- ठंडी हवाओं को रोककर जलवायु को संतुलित रखता है।
- मानसूनी हवाओं को रोककर वर्षा कराता है।
- जड़ी-बूटियाँ और पर्यटन स्थल अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं।
भारत से उदाहरण: कश्मीर की डल झील पर्यटकों का आकर्षण है।
विश्व से उदाहरण: माउंट एवरेस्ट विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है।
2. उत्तर का मैदानी भाग
उत्तर का मैदानी भाग हिमालय के दक्षिण में सिन्धु, गंगा, और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा निर्मित उपजाऊ जलोढ़ मैदान है।विशेषताएँ:
- यह पश्चिम से पूरब की ओर ढाल वाला है।
- यह तीन नदी-तंत्रों में बँटा है: सिन्धु, गंगा, और ब्रह्मपुत्र।
- सिन्धु नदी-तंत्र: सिन्धु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास; उद्गम: मानसरोवर झील, तिब्बत।
- गंगा नदी-तंत्र: गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती; उद्गम: गंगोत्री हिमनद।
- ब्रह्मपुत्र नदी-तंत्र: ब्रह्मपुत्र, लोहित, दिबांग; उद्गम: मानसरोवर झील, तिब्बत।
- भाबर और तराई: भाबर में नदियाँ कंकड़-पत्थर जमा करती हैं, तराई उपजाऊ और दलदली है।
महत्व:
- उपजाऊ मिट्टी के कारण कृषि और पशुपालन आधारित उद्योग।
- समतल भूमि के कारण सड़क और रेल परिवहन का विकास।
भारत से उदाहरण: गंगा मैदान में धान की खेती।
विश्व से उदाहरण: भारत का गंगा मैदान विश्व के सबसे उपजाऊ मैदानों में से एक है।
3. थार का मरुस्थल
थार का मरुस्थल भारत के उत्तर-पश्चिम में शुष्क, रेतीला क्षेत्र है, जो अरावली पर्वत से पाकिस्तान की सीमा तक फैला है।विशेषताएँ:
- यह शुष्क और गर्म क्षेत्र है, जहाँ वनस्पति कम है।
- मुख्य नदी: लूनी, जो साँभर झील में समाप्त होती है।
- साँभर झील में नमक का उत्पादन होता है।
महत्व:
- रेगिस्तानी पर्यटन और सौर ऊर्जा उत्पादन।
- खनिज संसाधन जैसे जिप्सम।
भारत से उदाहरण: जैसलमेर में रेगिस्तानी पर्यटन।
विश्व से उदाहरण: थार मरुस्थल सहारा मरुस्थल से छोटा लेकिन समान शुष्क जलवायु वाला।
4. दक्षिण का पठारी भाग
दक्षिण का पठारी भाग प्रायद्वीपीय भारत का त्रिभुजाकार पठार है, जो प्राचीन कठोर चट्टानों से बना है।विशेषताएँ:
- यह अरावली, विन्ध्य, सतपुड़ा, और पूर्वी-पश्चिमी घाटों से घिरा है।
- उपविभाग: मालवा पठार, छोटा नागपुर पठार, दक्कन पठार।
- मालवा पठार: उत्तर-पश्चिम में, चम्बल और बेतवा नदियों का उद्गम।
- छोटा नागपुर पठार: लोहा और कोयला जैसे खनिजों से समृद्ध।
- दक्कन पठार: महानदी, गोदावरी, कृष्णा नदियाँ; ढाल पूरब की ओर।
महत्व:
- खनिज संसाधन जैसे लोहा, कोयला, और मैंगनीज।
- जलविद्युत उत्पादन के लिए उपयुक्त।
- सागौन और चंदन जैसे बहुमूल्य वृक्ष।
भारत से उदाहरण: छोटा नागपुर में कोयला खनन।
विश्व से उदाहरण: दक्कन पठार ऑस्ट्रेलिया के पठारी क्षेत्रों से समानता रखता है।
5. तटीय मैदान और द्वीपसमूह
तटीय मैदान पश्चिमी और पूर्वी घाटों के किनारे स्थित हैं, और द्वीपसमूह भारत के समुद्री क्षेत्र में हैं।विशेषताएँ:
- पश्चिमी तटीय मैदान: संकरा, कोई बड़ी नदी नहीं।
- पूर्वी तटीय मैदान: चौड़ा, महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी द्वारा डेल्टा निर्माण।
- झीलें: चिल्का, कोलेरू, पुलीकट।
- द्वीपसमूह: लक्षद्वीप (मूँगे से बने, अरब सागर) और अंडमान-निकोबार (बंगाल की खाड़ी)।
महत्व:
- पूर्वी तटीय मैदान में धान की खेती।
- बंदरगाह और मछली उद्योग का विकास।
- द्वीपसमूह में पर्यटन और जैव-विविधता।
भारत से उदाहरण: सुंदरबन डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा।
विश्व से उदाहरण: सुंदरबन डेल्टा नील नदी डेल्टा से तुलनीय।