हिन्दी वर्णमाला
वर्णमाला की परिभाषा
वर्णमाला: वर्णों का व्यवस्थित क्रमबद्ध समूह।
- उदाहरण: क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ...
- वर्ण समूह: ख, च, म, त, प, क्ष, श, श्र
तथ्य: हिन्दी वर्णमाला देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, जो ब्राह्मी लिपि (ईसा पूर्व 300) का परिष्कृत रूप है। इसे नागरी लिपि भी कहते हैं।
हिन्दी वर्णमाला बाएँ से दाएँ लिखी जाती है।
हिन्दी वर्णमाला में कुल वर्ण
| भेद | संख्या | वर्ण |
|---|---|---|
| स्वर | 11 | अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ |
| मूल व्यंजन | 33 | क से ह तक |
| संयुक्त व्यंजन | 4 | क्ष, त्र, ज्ञ, श्र |
| द्विगुण व्यंजन | 2 | ड़, ढ़ |
| आयोगवाह | 2 | अं, अः |
| कुल | 53 | हिन्दी वर्णमाला |
1. स्वर वर्ण (कुल: 11)
परिभाषा: जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से, बिना किसी अवरोध या सहायता के होता है। इन्हें अच् भी कहते हैं।
स्वरों की सूची:
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ
कालमान (मात्रा) के आधार पर भेद:
| प्रकार | संख्या | वर्ण | समय | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| हस्व/लघु/मूल | 4 | अ, इ, उ, ऋ | 1 मात्रा | अप, इक, उमर, ऋषि |
| दीर्घ/गुरु/संधि | 7 | आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ | 2 मात्राएँ | आम, कील, ऊन, एक, ऐनक, ओस, औरत |
| प्लुत | 1 | अः (ॐ) | 3 मात्राएँ | ओ३म् (वैदिक) |
उत्पत्ति के आधार पर:
- मूल दीर्घ (सजातीय): आ, ई, ऊ →
अ+अ=आ,इ+इ=ई,उ+उ=ऊ - संयुक्त दीर्घ (विजातीय): ए, ऐ, ओ, औ →
अ+इ=ए,अ+ए=ऐ,अ+उ=ओ,अ+ओ=औ
महत्वपूर्ण तथ्य:
- इ, ई, ऋ स्त्रीलिंग वर्ण हैं। शेष पुल्लिंग।
- हिन्दी में ॠ का प्रयोग नहीं होता (केवल संस्कृत में)।
- ऑ आगत स्वर है (अंग्रेजी से) → ऑफिस, ऑडियो।
- डॉ. भोलानाथ तिवारी: स्वरों की संख्या 10 (ऋ को स्वर नहीं मानते)।
मात्राएँ (कुल: 10)
ा, ि, ी, ु, ू, ृ, े, ै, ो, ौ
ध्यान दें:
- अ के लिए कोई मात्रा नहीं।
- मात्राएँ केवल स्वरों की होती हैं।
- लु विलुप्त स्वर है (संस्कृत में)।
2. व्यंजन वर्ण (कुल: 39)
परिभाषा: जिन वर्णों का उच्चारण स्वरों की सहायता से होता है। प्रत्येक व्यंजन में अ ध्वनि अंतर्निहित → क = क् + अ। इन्हें परतंत्र कहते हैं।
मूल व्यंजन (33):
| प्रकार | संख्या | वर्ण | विशेष |
|---|---|---|---|
| स्पर्श (वर्गीय) | 25 | क से प तक | 5 वर्ग × 5 = 25 |
| अन्तःस्थ | 4 | य, र, ल, व | अर्द्धस्वर |
| ऊष्म | 4 | श, ष, स, ह | संघर्षी |
अतिरिक्त व्यंजन:
- संयुक्त (4): क्ष, त्र, ज्ञ, श्र
-
संयुक्त (संयुक्त व्यंजन – 4): क्ष, त्र, ज्ञ, श्र
क्ष (kṣa): क् + ष के मिलने से बना संयुक्त व्यंजन।
उदाहरण: क्षत्रिय, क्षमता, क्षमा, क्षीण
त्र (tra): त् + र के मिलने से बना संयुक्त व्यंजन।
उदाहरण: त्रिकोण, त्रय, त्रिभुज, त्रास
ज्ञ (gya): ज् + ञ के मिलने से बना संयुक्त व्यंजन।
उदाहरण: ज्ञान, ज्ञाता, विज्ञापन, ज्ञानी
श्र (śra): श् + र के मिलने से बना संयुक्त व्यंजन।
उदाहरण: श्री, श्रम, श्रुति, श्रेणी
नोट: संयुक्त व्यंजन दो या दो से अधिक वर्णों के मेल से बनते हैं, जिनका उच्चारण एक ध्वनि की तरह होता है। - द्विगुण (2): ड़, ढ़ (हिन्दी + फारसी)
- आगत (5): क़, ख़, ग़, ज़, फ़ (अरबी-फारसी)
विशेष नाम:
- ड़, ढ़ → द्विगुण, उत्क्षिप्त, उश्रिप्य, ताड़नजात
- ङ, ञ, ण, न, म → पंचमाक्षर, नासिक्य, अनुनासिक
- य, व → अर्द्धस्वर (कभी स्वर, कभी व्यंजन)
- र → लुंठित, प्रकम्पित, कम्पन्नजात
- ल → पार्श्विक
- ह → काकल्य, स्वरयंत्रमुखी, ऊष्म-संघर्षी
उच्चारण स्थान (कुल 6)
| स्थान | वर्ण | उदाहरण |
|---|---|---|
| कंठ | अ, आ, क, ख, ग, घ, ङ, ह, अः | कमल, हँसना |
| तालु | इ, ई, च, छ, ज, झ, ञ, य, श | चाय, श्याम |
| मूर्धा | ऋ, ट, ठ, ड, ढ, ण, ड़, ढ़, र, ष | टमाटर, डर |
| दन्त | त, थ, द, ध, न, ल, स | तारा, सूरज |
| ओष्ठ | उ, ऊ, प, फ, ब, भ, म | उमंग, फल |
| कंठतालु | ए, ऐ | एक, ऐनक |
| कंठोष्ठ | ओ, औ | ओस, औरत |
तथ्य: हिन्दी में मूल उच्चारण स्थान 5 हैं, पर स्वरों का उच्चारण 6 स्थानों से होता है।
आयोगवाह (2)
- अनुस्वार (अं): तत्सम शब्दों में → कंकण, चंचल
- विसर्ग (अः): तत्सम शब्दों में → दुःख, निःशुल्क
ये स्वर और व्यंजन दोनों के साथ लगते हैं।
हलंत (्)
व्यंजन को स्वर रहित करने के लिए नीचे तिरछी रेखा → क्, ख्, ग्
उदाहरण: क् + ष = क्ष (हलंत का प्रयोग)
प्राण वायु (अल्पप्राण / महाप्राण)
| अल्पप्राण | महाप्राण |
|---|---|
| क, ग, ङ, च, ज, ञ, ट, ड, ड़, त, द, न, प, ब, म, य, र, ल, व | ख, घ, छ, झ, ठ, ढ, ढ़, थ, ध, फ, भ, श, ष, स, ह |
घोषत्व (अघोष / सघोष)
| अघोष | सघोष |
|---|---|
| क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ, श, ष, स | ग, घ, ज, झ, ड, ढ, ड़, ढ़, द, ध, ब, भ, ङ, ञ, ण, न, म, य, र, ल, व, ह |
नोट: सभी स्वर सघोष होते हैं। पंचमाक्षर (ङ, ञ, ण, न, म) प्राण और सघोष होते हैं।
संयुक्त ध्वनियाँ
- संयुक्त: प्राण, क्लांत, ट्रक, ड्राइवर
- सम्पृक्त: कम्बल (क + म् + बल), बन्दर (ब + न् + दर)
- युग्मक/द्वित्व: दिक्कत, मसक्कत, प्रसन्न
विराम चिह्न (कुल 20+)
परिभाषा: पढ़ते या लिखते समय ठहराव के लिए प्रयुक्त चिह्न।
| चिह्न | नाम | उपयोग |
|---|---|---|
| , | अल्प विराम | थोड़ा ठहराव |
| ; | अर्द्ध विराम | मध्यम ठहराव |
| | | पूर्ण विराम | पूर्ण ठहराव |
| ? | प्रश्नवाचक | प्रश्न के अंत में |
| ! | विस्मयादिबोधक | आश्चर्य, हर्ष |
| "..." | दुहरा उद्धरण | कथन |
| '...' | इकहरा उद्धरण | विशेष बल |
| ( ) | कोष्ठक | स्पष्टीकरण |
| - | योजक चिह्न | रात-दिन, मारना-पीटना |
| : | उपविराम | विवरण के पहले |
| ^ | हंस पद | त्रुटि सुधार |
| ० | लाघव चिह्न | डॉ०, उ०प्र० |
पं. कामता प्रसाद गुरु: "विराम चिह्नों की संख्या लगभग 20 है।"
अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य
- हिन्दी शब्दकोश में अं 'अ' से पहले आता है।
- केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय: 11 स्वर + 35 व्यंजन मानक।
- संस्कृत में 9 स्वर: अ, इ, उ, ऋ, लृ, ए, ऐ, ओ, औ
- प्लुत स्वर केवल वैदिक संस्कृत में।
- अनुस्वार पंचम वर्ण का कार्य करता है।
- संस्कृत में योजक चिह्न (-) का प्रयोग नहीं।