6. पंचायती राज और नगर प्रशासन
- 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 संसद द्वारा 22 दिसंबर, 1992 को
पारित किया गया और 24 अप्रैल, 1993 को राष्ट्रपति की सहमति के बाद लागू हुआ, जिसने पंचायती राज संस्थाओं को
संवैधानिक दर्जा प्रदान किया। (UPSC Pre 1996)
- 74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 संसद द्वारा 22 दिसंबर, 1992 को
पारित किया गया और 1 जून, 1993 को लागू हुआ, जिसने नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया। (SSC CGL
2017)
- 73वां संशोधन संविधान के भाग-9 में अनुच्छेद 243 से 243-O तक के
प्रावधानों द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता प्रदान करता है। (UPPCS Pre 2018)
- 74वां संशोधन संविधान के भाग-9A में अनुच्छेद 243P से 243ZG तक के
प्रावधानों द्वारा नगर पालिकाओं को संवैधानिक मान्यता प्रदान करता है। (BPSC Pre 2019)
- 73वां संशोधन पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने वाला
ऐतिहासिक संशोधन है, जिसने बलवंत राय मेहता समिति (1957) और अशोक मेहता समिति (1978) की सिफारिशों को कानूनी
स्वरूप दिया। (SSC CHSL 2018)
- 74वां संशोधन नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने वाला
महत्वपूर्ण संशोधन है, जिसने शहरी स्थानीय शासन को मजबूत करने हेतु K. सन्ताराम समिति की सिफारिशों को
कार्यान्वित किया। (MPPCS Pre 2016)
- 73वां संशोधन संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़कर पंचायतों को 29 विषयों पर
कार्य करने का अधिकार देता है, जिसमें कृषि, भूमि सुधार, लघु सिंचाई आदि शामिल हैं। (SSC CPO 2019)
- 74वां संशोधन संविधान में 12वीं अनुसूची जोड़कर नगर पालिकाओं को 18
विषयों पर कार्य करने का अधिकार देता है, जिसमें नगर योजना, आर्थिक व सामाजिक विकास, सड़कें आदि शामिल हैं।
(UPPCS Pre 2017)
- पंचायती राज व्यवस्था में त्रिस्तरीय संरचना का प्रावधान है: ग्राम स्तर
पर ग्राम पंचायत, खंड स्तर पर पंचायत समिति और जिला स्तर पर जिला परिषद। (BPSC Pre 2018)
- पंचायती राज में ग्राम पंचायत निम्नतम स्तर की इकाई है जो एक या अधिक
गाँवों के समूह के लिए गठित की जाती है और सीधे जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। (SSC CGL 2019)
- पंचायती राज में पंचायत समिति मध्यवर्ती स्तर की इकाई है जो खंड/विकास
खंड स्तर पर कार्य करती है और ग्राम पंचायतों के कार्यों में समन्वय स्थापित करती है। (MPPCS Pre 2015)
- पंचायती राज में जिला परिषद सर्वोच्च स्तर की इकाई है जो जिला स्तर पर
कार्य करती है और जिले के समग्र विकास की योजनाएँ बनाती व क्रियान्वित करती है। (SSC CHSL 2017)
- ग्राम पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और यदि इसे समय से पहले भंग
किया जाता है तो 6 माह के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य है। (UPPCS Pre 2016)
- ग्राम पंचायत का गठन संविधान के अनुच्छेद 243B के तहत होता है, जो ग्राम
स्तर पर पंचायतों के गठन का प्रावधान करता है। (BPSC Pre 2016)
- पंचायत समिति का गठन ब्लॉक/विकास खंड स्तर पर होता है और यह ग्राम
पंचायतों एवं जिला परिषद के बीच कड़ी का कार्य करती है। (SSC CPO 2018)
- जिला परिषद जिला स्तर पर कार्य करती है और जिले के ग्रामीण विकास की
योजनाओं का समन्वय व निगरानी करती है। (MPPCS Pre 2017)
- 73वें संविधान संशोधन के तहत पंचायतों में महिलाओं के लिए कम से कम 33%
आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिसे अब कई राज्यों जैसे बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड
आदि ने बढ़ाकर 50% कर दिया है। (UPPCS Pre 2019)
- 74वें संविधान संशोधन के तहत नगर निकायों में महिलाओं के लिए कम से कम
33% आरक्षण अनिवार्य किया गया है, जिसे कई राज्यों ने बढ़ाकर 50% कर दिया है। (BPSC Pre 2015)
- ग्राम पंचायत का प्रमुख सरपंच होता है, जिसका चुनाव ग्राम पंचायत क्षेत्र
के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। (SSC CHSL 2019)
- पंचायत समिति का प्रमुख अध्यक्ष होता है, जिसका चुनाव पंचायत समिति के
सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। (MPPCS Pre 2018)
- जिला परिषद का प्रमुख जिला पंचायत अध्यक्ष होता है, जिसका चुनाव जिला
परिषद के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। (SSC CPO 2017)
- 73वां संशोधन अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए पंचायतों में सीटों के आरक्षण
का प्रावधान करता है, जो उनकी जनसंख्या के अनुपात में होता है। (UPPCS Pre 2015)
- 74वां संशोधन अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए नगर निकायों में सीटों के
आरक्षण का प्रावधान करता है, जो उनकी जनसंख्या के अनुपात में होता है। (BPSC Pre 2017)
- पंचायती राज में ग्राम सभा सर्वोच्च निकाय है, जिसमें ग्राम पंचायत
क्षेत्र के सभी पंजीकृत मतदाता सदस्य होते हैं और यह पंचायत के कार्यों पर नियंत्रण रखती है। (SSC CGL 2018)
- ग्राम सभा का गठन संविधान के अनुच्छेद 243A के तहत होता है, जो ग्राम
स्तर पर लोगों की सभा के गठन का प्रावधान करता है। (MPPCS Pre 2016)
- पंचायती राज में 29 विषय 11वीं अनुसूची में शामिल हैं, जिन पर पंचायतें
कानून बना सकती हैं और कार्य कर सकती हैं, जैसे कृषि, पशुपालन, मत्स्यपालन, लघु सिंचाई आदि। (SSC CHSL 2016)
- नगर पालिका का गठन संविधान के अनुच्छेद 243Q के तहत होता है, जो छोटे
शहरी क्षेत्रों के लिए नगर पालिकाओं के गठन का प्रावधान करता है। (UPPCS Pre 2018)
- नगर निगम बड़े शहरों के लिए गठित होता है, जो एक लाख से अधिक जनसंख्या
वाले शहरी क्षेत्रों में स्थापित किया जाता है। (BPSC Pre 2019)
- 74वां संशोधन में 18 विषय 12वीं अनुसूची में शामिल हैं, जिन पर नगर
पालिकाएँ कानून बना सकती हैं और कार्य कर सकती हैं, जैसे नगर योजना, सड़कें, जल आपूर्ति, सार्वजनिक
स्वास्थ्य आदि। (SSC CPO 2016)
- नगर पालिका का प्रमुख मेयर होता है, जिसका चुनाव नगर पालिका के सदस्यों
द्वारा किया जाता है और यह नगर पालिका की बैठकों की अध्यक्षता करता है। (MPPCS Pre 2015)
- नगर निगम का कार्यकाल 5 वर्ष होता है और यदि इसे समय से पहले भंग किया
जाता है तो 6 माह के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य है। (SSC CGL 2017)
- राज्य वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 243I के तहत होता है, जो
पंचायतों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण हेतु सिफारिशें करता है। (UPPCS Pre 2017)
- जिला योजना समिति का गठन संविधान के अनुच्छेद 243ZD के तहत होता है, जो
जिला स्तर पर विकास योजनाओं का समन्वय करती है। (BPSC Pre 2018)
- 73वां संशोधन ग्रामीण स्वशासन को बढ़ावा देकर लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक
पहुँचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। (SSC CHSL 2018)
- 74वां संशोधन शहरी स्वशासन को बढ़ावा देकर शहरी क्षेत्रों में स्थानीय
लोकतंत्र को मजबूत करने का प्रयास है। (MPPCS Pre 2019)
- ग्राम पंचायत में सरपंच एवं पंचों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से ग्राम
पंचायत क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा किया जाता है। (SSC CPO 2019)
- पंचायत समिति में अध्यक्ष एवं सदस्यों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से
संबंधित ग्राम पंचायतों के सदस्यों द्वारा किया जाता है। (UPPCS Pre 2016)
- जिला परिषद में अध्यक्ष एवं सदस्यों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से
संबंधित पंचायत समितियों के सदस्यों द्वारा किया जाता है। (BPSC Pre 2016)
- नगर पालिका में वार्ड समितियाँ होती हैं, जो नगर पालिका के विभिन्न
वार्डों में स्थानीय मुद्दों पर कार्य करती हैं। (SSC CGL 2019)
- नगर निगम में मेयर का निर्वाचन नगर निगम के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष
रूप से किया जाता है, जो नगर निगम की कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करता है। (MPPCS Pre 2017)
- राज्य वित्त आयोग हर 5 वर्ष में गठित होता है और पंचायतों एवं नगर
पालिकाओं के वित्तीय संसाधनों की समीक्षा कर सिफारिशें करता है। (SSC CHSL 2017)
- जिला योजना समिति जिला स्तर पर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लिए
समन्वित विकास योजनाएँ बनाती है। (UPPCS Pre 2015)
- 73वां संशोधन ग्राम सभा को महत्वपूर्ण शक्तियाँ प्रदान करता है, जिसमें
विकास योजनाओं की स्वीकृति, सामाजिक अंकेक्षण आदि शामिल हैं। (BPSC Pre 2017)
- 74वां संशोधन नगर पालिकाओं को व्यापक शक्तियाँ प्रदान करता है, जिसमें
नगर योजना, कर लगाना, बजट बनाना आदि शामिल हैं। (SSC CPO 2018)
- पंचायती राज में ग्राम पंचायत का अपना बजट होता है, जिसे वह स्थानीय
आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करती है और क्रियान्वित करती है। (MPPCS Pre 2016)
- नगर निगम का बजट नगर निगम स्वयं तैयार करता है, जिसमें राजस्व के स्रोत
और व्यय के मद शामिल होते हैं। (SSC CGL 2016)
- राज्य वित्त आयोग केंद्र एवं राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण
की सिफारिश करता है, विशेषकर पंचायतों एवं नगर पालिकाओं के लिए। (UPPCS Pre 2019)
- जिला योजना समिति में पंचायत और नगर पालिका के सदस्य होते हैं, जो जिले
के समग्र विकास हेतु योजनाओं का समन्वय करते हैं। (BPSC Pre 2015)
- 73वां संशोधन पंचायतों को स्थानीय स्तर पर कर लगाने का अधिकार देता है,
जैसे संपत्ति कर, व्यापार कर, मनोरंजन कर आदि। (SSC CHSL 2019)
- 74वां संशोधन नगर पालिकाओं को स्थानीय स्तर पर कर लगाने का अधिकार देता
है, जैसे संपत्ति कर, जल कर, सफाई कर आदि। (MPPCS Pre 2018)
- ग्राम पंचायत के सदस्यों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है, जो
संविधान द्वारा तय की गई है। (SSC CPO 2017)
- नगर पालिका के सदस्यों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित है, जो
संविधान द्वारा तय की गई है। (UPPCS Pre 2018)
- 73वां संशोधन पंचायतों को वित्तीय शक्तियाँ प्रदान करता है, जिसमें बजट
बनाना, कर लगाना, अनुदान प्राप्त करना आदि शामिल हैं। (BPSC Pre 2019)
- 74वां संशोधन नगर निगम को वित्तीय शक्तियाँ प्रदान करता है, जिसमें बजट
बनाना, कर लगाना, ऋण लेना आदि शामिल हैं। (SSC CGL 2018)
- ग्राम सभा में ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते
हैं, जो पंचायत के कार्यों पर नियंत्रण रखते हैं। (MPPCS Pre 2015)
- पंचायत समिति में ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि होते हैं, जो खंड स्तर पर
विकास कार्यों का समन्वय करते हैं। (SSC CHSL 2016)
- जिला परिषद में पंचायत समिति के प्रतिनिधि होते हैं, जो जिला स्तर पर
विकास कार्यों का समन्वय करते हैं। (UPPCS Pre 2017)
- नगर पालिका में वार्ड पार्षद चुने जाते हैं, जो संबंधित वार्ड के
निवासियों के प्रतिनिधि होते हैं। (BPSC Pre 2018)
- नगर निगम में आयुक्त प्रशासकीय प्रमुख होता है, जो नगर निगम के दैनिक
प्रशासनिक कार्यों का संचालन करता है। (SSC CPO 2016)
- राज्य वित्त आयोग पंचायतों को अनुदान की सिफारिश करता है, जो पंचायतों के
वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक है। (MPPCS Pre 2017)
- जिला योजना समिति जिला स्तर पर विकास योजनाओं को मंजूरी देती है और उनके
क्रियान्वयन की निगरानी करती है। (SSC CGL 2017)
- 73वां संशोधन पंचायतों को स्वायत्तता प्रदान करता है, जिससे वे स्थानीय
मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें। (UPPCS Pre 2016)
- 74वां संशोधन नगर पालिकाओं को स्वायत्तता प्रदान करता है, जिससे वे शहरी
विकास से संबंधित मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें। (BPSC Pre 2016)
- ग्राम पंचायत में सामाजिक विकास के कार्य शामिल हैं, जैसे शिक्षा,
स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास आदि। (SSC CHSL 2018)
- पंचायत समिति में विकास योजनाएँ बनाई जाती हैं, जो खंड स्तर पर
क्रियान्वित की जाती हैं। (MPPCS Pre 2019)
- जिला परिषद में जिला स्तर की योजनाएँ बनती हैं, जो जिले के समग्र विकास
हेतु महत्वपूर्ण होती हैं। (SSC CPO 2019)
- नगर पालिका में स्वच्छता का कार्य शामिल है, जिसमें कूड़ा प्रबंधन, सफाई
व्यवस्था आदि सम्मिलित हैं। (UPPCS Pre 2015)
- नगर निगम में शहरी विकास के कार्य शामिल हैं, जैसे सड़क निर्माण, जल
आपूर्ति, सीवरेज व्यवस्था आदि। (BPSC Pre 2017)
- राज्य वित्त आयोग का गठन राज्यपाल द्वारा किया जाता है, जो पंचायतों एवं
नगर पालिकाओं के वित्तीय सुदृढ़ीकरण हेतु सिफारिशें करता है। (SSC CGL 2019)
- जिला योजना समिति का अध्यक्ष जिला कलेक्टर होता है, जो समिति के कार्यों
का संचालन करता है। (MPPCS Pre 2016)
- 73वां संशोधन ग्राम सभा को नीति निर्माण का अधिकार देता है, जिससे
स्थानीय लोग विकास प्रक्रिया में सीधे भाग ले सकें। (SSC CHSL 2017)
- 74वां संशोधन नगर पालिका को नीति निर्माण का अधिकार देता है, जिससे शहरी
निवासी शहरी विकास प्रक्रिया में सीधे भाग ले सकें। (UPPCS Pre 2019)
- ग्राम पंचायत में सामाजिक लेखा परीक्षा होती है, जिसके माध्यम से पंचायत
के कार्यों एवं व्यय की जाँच की जाती है। (BPSC Pre 2015)
- पंचायत समिति में ग्रामीण विकास योजनाएँ लागू होती हैं, जो खंड स्तर पर
क्रियान्वित की जाती हैं। (SSC CPO 2018)
- जिला परिषद में ग्रामीण विकास की निगरानी होती है, जिससे जिले के ग्रामीण
क्षेत्रों का समुचित विकास सुनिश्चित हो सके। (MPPCS Pre 2018)
- नगर पालिका में शहरी स्वच्छता की जिम्मेदारी है, जिसमें कूड़ा प्रबंधन,
सफाई व्यवस्था आदि शामिल हैं। (SSC CGL 2016)
- नगर निगम में बुनियादी ढांचा विकास शामिल है, जैसे सड़कें, पुल, जल
आपूर्ति, सीवरेज आदि का निर्माण एवं रखरखाव। (UPPCS Pre 2018)
- राज्य वित्त आयोग पंचायतों के लिए कर सुझाव देता है, जिससे उनके राजस्व
के स्रोतों में विविधता आ सके। (BPSC Pre 2019)
- जिला योजना समिति में शहरी और ग्रामीण प्रतिनिधि होते हैं, जो जिले के
समन्वित विकास हेतु योजनाएँ बनाते हैं। (SSC CHSL 2019)
- 73वां संशोधन पंचायतों को प्रशासकीय शक्तियाँ देता है, जिससे वे स्थानीय
प्रशासन का संचालन कर सकें। (MPPCS Pre 2015)
- 74वां संशोधन नगर पालिकाओं को प्रशासकीय शक्तियाँ देता है, जिससे वे शहरी
प्रशासन का संचालन कर सकें। (SSC CPO 2017)
- ग्राम पंचायत में ग्राम विकास योजनाएँ बनती हैं, जो गाँव के विकास हेतु
महत्वपूर्ण होती हैं। (UPPCS Pre 2017)
- पंचायत समिति में ग्राम पंचायतों का समन्वय होता है, जिससे खंड स्तर पर
विकास कार्यों में एकरूपता बनी रहे। (BPSC Pre 2016)
- जिला परिषद में जिला स्तर की नीतियाँ बनती हैं, जो जिले के समग्र विकास
हेतु मार्गदर्शक होती हैं। (SSC CGL 2018)
- नगर पालिका में जल आपूर्ति का कार्य शामिल है, जो शहरी निवासियों की
मूलभूत आवश्यकता है। (MPPCS Pre 2017)
- नगर निगम में सड़क निर्माण का कार्य शामिल है, जो शहरी अवसंरचना का
महत्वपूर्ण भाग है। (SSC CHSL 2016)
- राज्य वित्त आयोग का कार्य वित्तीय सिफारिशें करना है, जो पंचायतों एवं
नगर पालिकाओं के वित्तीय सुदृढ़ीकरण हेतु आवश्यक है। (UPPCS Pre 2016)
- जिला योजना समिति में विकास योजनाएँ स्वीकृत होती हैं, जो जिले के
समन्वित विकास हेतु महत्वपूर्ण हैं। (BPSC Pre 2018)
- 73वां संशोधन पंचायतों को स्वशासन का अधिकार देता है, जो लोकतंत्र की मूल
भावना के अनुरूप है। (SSC CPO 2016)
- 74वां संशोधन नगर पालिकाओं को स्वशासन का अधिकार देता है, जो शहरी
लोकतंत्र को मजबूत करता है। (MPPCS Pre 2019)
- ग्राम पंचायत में सामुदायिक विकास कार्यक्रम चलते हैं, जो स्थानीय लोगों
की सहभागिता से संचालित होते हैं। (SSC CGL 2017)
- पंचायत समिति में ग्रामीण योजनाओं का कार्यान्वयन होता है, जो खंड स्तर
पर विकास प्रक्रिया को गति देता है। (UPPCS Pre 2015)
- जिला परिषद में जिला विकास योजनाएँ बनती हैं, जो जिले के समग्र विकास
हेतु आवश्यक हैं। (BPSC Pre 2017)
- नगर पालिका में शहरी नियोजन का कार्य शामिल है, जो शहरों के व्यवस्थित
विकास हेतु महत्वपूर्ण है। (SSC CHSL 2018)
- नगर निगम में शहरी स्वच्छता का कार्य शामिल है, जो शहरों की स्वच्छता एवं
सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करता है। (MPPCS Pre 2016)
- राज्य वित्त आयोग पंचायतों को वित्तीय सहायता देता है, जो उनके कार्यों
के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक है। (SSC CPO 2019)
- जिला योजना समिति में ग्रामीण-शहरी समन्वय होता है, जो जिले के संतुलित
विकास हेतु महत्वपूर्ण है। (UPPCS Pre 2019)
- 73वां संशोधन पंचायतों को कर संग्रह का अधिकार देता है, जो उनके वित्तीय
स्वावलंबन हेतु आवश्यक है। (BPSC Pre 2015)
- 74वां संशोधन नगर पालिकाओं को कर संग्रह का अधिकार देता है, जो उनके
वित्तीय स्वावलंबन हेतु आवश्यक है। (SSC CGL 2019)
- ग्राम पंचायत में सामाजिक कल्याण योजनाएँ लागू होती हैं, जो ग्रामीण
क्षेत्रों के सामाजिक विकास हेतु महत्वपूर्ण हैं। (MPPCS Pre 2018)
- पंचायत समिति में ग्राम पंचायतों की निगरानी होती है, जिससे उनके कार्यों
में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। (SSC CHSL 2017)
- जिला परिषद में जिला स्तर की नीतियों का कार्यान्वयन होता है, जो जिले के
विकास को दिशा देता है। (UPPCS Pre 2018)
- नगर पालिका में शहरी बुनियादी ढांचा विकास होता है, जो शहरों के
आधुनिकीकरण हेतु आवश्यक है। (BPSC Pre 2019)
- नगर निगम में शहरी नियोजन का कार्य शामिल है, जो शहरों के व्यवस्थित
विकास हेतु मार्गदर्शक होता है। (SSC CPO 2018)
- राज्य वित्त आयोग का गठन हर 5 वर्ष में होता है, जो पंचायतों एवं नगर
पालिकाओं के वित्तीय सुदृढ़ीकरण हेतु नियमित सिफारिशें करता है। (MPPCS Pre 2015)
- जिला योजना समिति में विकास योजनाओं का समन्वय होता है, जो जिले के
संतुलित विकास हेतु आवश्यक है। (SSC CGL 2016)
- 73वां संशोधन पंचायतों को स्वायत्त शक्तियाँ देता है, जो स्थानीय स्वशासन
की मूल भावना के अनुरूप है। (UPPCS Pre 2017)
- 74वां संशोधन नगर पालिकाओं को स्वायत्त शक्तियाँ देता है, जो शहरी
स्वशासन की मूल भावना के अनुरूप है। (BPSC Pre 2016)
- ग्राम पंचायत में सामाजिक विकास की जिम्मेदारी है, जो ग्रामीण क्षेत्रों
के सामाजिक उत्थान हेतु महत्वपूर्ण है। (SSC CHSL 2019)
- पंचायत समिति में ग्रामीण विकास की निगरानी होती है, जिससे विकास कार्यों
की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। (MPPCS Pre 2017)
- जिला परिषद में जिला स्तर की योजनाओं का कार्यान्वयन होता है, जो जिले के
विकास को गति देता है। (SSC CPO 2017)
- नगर पालिका में शहरी स्वच्छता का कार्य होता है, जो शहरों की स्वच्छता
एवं साफ-सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करता है। (UPPCS Pre 2016)
- नगर निगम में शहरी बुनियादी ढांचा का विकास होता है, जो शहरों के
आधुनिकीकरण एवं विकास हेतु आवश्यक है। (BPSC Pre 2018)
- राज्य वित्त आयोग पंचायतों को वित्तीय संसाधन देता है, जो उनके कार्यों
के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक है। (SSC CGL 2018)
- जिला योजना समिति में ग्रामीण और शहरी योजनाएँ बनती हैं, जो जिले के
संतुलित विकास हेतु महत्वपूर्ण हैं। (MPPCS Pre 2019)
- 73वां संशोधन ग्राम सभा को शक्तियाँ देता है, जो स्थानीय लोकतंत्र को
मजबूत करने हेतु महत्वपूर्ण है। (SSC CHSL 2016)
- 74वां संशोधन नगर पालिकाओं को नीति निर्माण का अधिकार देता है, जो शहरी
लोकतंत्र को मजबूत करने हेतु महत्वपूर्ण है। (UPPCS Pre 2015)
- ग्राम पंचायत में सामुदायिक विकास योजनाएँ बनती हैं, जो स्थानीय लोगों की
सहभागिता से संचालित होती हैं। (BPSC Pre 2017)
- पंचायत समिति में ग्रामीण विकास योजनाएँ लागू होती हैं, जो खंड स्तर पर
विकास प्रक्रिया को गति देती हैं। (SSC CPO 2016)
- जिला परिषद में जिला स्तर की नीतियाँ बनती हैं, जो जिले के समग्र विकास
हेतु मार्गदर्शक होती हैं। (MPPCS Pre 2018)
- नगर पालिका में शहरी नियोजन का कार्य होता है, जो शहरों के व्यवस्थित
विकास हेतु महत्वपूर्ण है। (SSC CGL 2017)
- नगर निगम में शहरी स्वच्छता का कार्य होता है, जो शहरों की स्वच्छता एवं
सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करता है। (UPPCS Pre 2019)
- राज्य वित्त आयोग का कार्य वित्तीय संसाधन वितरण है, जो पंचायतों एवं नगर
पालिकाओं के वित्तीय सुदृढ़ीकरण हेतु आवश्यक है। (BPSC Pre 2015)
- जिला योजना समिति में विकास योजनाओं का समन्वय होता है, जो जिले के
संतुलित विकास हेतु महत्वपूर्ण है। (SSC CHSL 2018)
- 73वां संशोधन पंचायतों को कर लगाने का अधिकार देता है, जो उनके वित्तीय
स्वावलंबन हेतु आवश्यक है। (MPPCS Pre 2016)
- 74वां संशोधन नगर पालिकाओं को कर लगाने का अधिकार देता है, जो उनके
वित्तीय स्वावलंबन हेतु आवश्यक है। (SSC CPO 2019)
- ग्राम पंचायत में सामाजिक कल्याण योजनाएँ लागू होती हैं, जो ग्रामीण
क्षेत्रों के सामाजिक विकास हेतु महत्वपूर्ण हैं। (UPPCS Pre 2018)
- पंचायत समिति में ग्रामीण विकास की निगरानी होती है, जिससे विकास कार्यों
की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। (BPSC Pre 2019)
- जिला परिषद में जिला स्तर की योजनाएँ बनती हैं, जो जिले के समग्र विकास
हेतु महत्वपूर्ण हैं। (SSC CGL 2019)
- नगर पालिका में शहरी बुनियादी ढांचा विकास होता है, जो शहरों के
आधुनिकीकरण एवं विकास हेतु आवश्यक है। (MPPCS Pre 2015)
- नगर निगम में शहरी नियोजन का कार्य शामिल है, जो शहरों के व्यवस्थित
विकास हेतु मार्गदर्शक होता है। (SSC CHSL 2017)
- राज्य वित्त आयोग पंचायतों को वित्तीय सहायता देता है, जो उनके कार्यों
के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक है। (UPPCS Pre 2017)
- जिला योजना समिति में ग्रामीण और शहरी योजनाएँ बनती हैं, जो जिले के
संतुलित विकास हेतु महत्वपूर्ण हैं। (BPSC Pre 2015)