2. मौलिक अधिकार, कर्तव्य और नीति निदेशक तत्व
- मौलिक अधिकार संविधान के भाग III में हैं।
- मौलिक अधिकार अनुच्छेद 12 से 35 तक वर्णित हैं।
- अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार प्रदान करता है।
- अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान आदि के आधार पर भेदभाव को
निषिद्ध करता है।
- अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता सुनिश्चित करता है।
- अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है।
- अनुच्छेद 18 उपाधियों (Titles) के उन्मूलन का प्रावधान करता है।
- अनुच्छेद 19 नागरिकों को छह स्वतंत्रताएँ प्रदान करता है — वाक् एवं
अभिव्यक्ति, सभा, संघ, गमन,
निवास और व्यवसाय की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 19(1)(a) वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है।
- अनुच्छेद 19(1)(c) शांतिपूर्ण और निरायुध सभा करने की स्वतंत्रता देता
है।
- अनुच्छेद 19(1)(g) किसी भी व्यवसाय, व्यापार या व्यवसाय करने की
स्वतंत्रता देता है।
- अनुच्छेद 20 अपराधों में दोषसिद्धि से संरक्षण देता है।
- अनुच्छेद 20(1) पूर्वव्यापी दंड विधान से संरक्षण प्रदान करता है।
- अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
- अनुच्छेद 21 में ‘जीवन’ की व्याख्या में गरिमामय जीवन के लिए आवश्यक
अधिकार शामिल हैं।
- अनुच्छेद 21A 6–14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का
अधिकार सुनिश्चित करता है।
- अनुच्छेद 22 निवारक नजरबंदी से संरक्षण देता है।
- अनुच्छेद 23 मानव तस्करी और बेगार (जबरन श्रम) पर रोक लगाता है।
- अनुच्छेद 24 चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों आदि में कार्य
करने से रोकता है।
- अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के पालन, आचरण एवं प्रचार की
स्वतंत्रता देता है।
- अनुच्छेद 26 धार्मिक कार्यों के प्रबंधन की स्वतंत्रता देता है।
- अनुच्छेद 27 किसी धर्म विशेष की अभिवृद्धि के लिए कर लगाने से मुक्ति
देता है।
- अनुच्छेद 28 राज्य पोषित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा पर रोक
लगाता है।
- अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यक वर्गों के हितों की रक्षा करता है।
- अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका
प्रशासन करने का अधिकार देता
है।
- संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31) 44वें संशोधन (1978) द्वारा हटाकर
अनुच्छेद 300A के अंतर्गत विधिक
अधिकार बनाया गया।
- अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्रदान करता है; इसे डॉ. भीमराव
अम्बेडकर ने संविधान की
आत्मा कहा।
- अनुच्छेद 33 संसद को सशस्त्र बलों आदि में मौलिक अधिकारों को सीमित करने
का अधिकार देता है।
- अनुच्छेद 34 आपात या सैनिक शासन के दौरान मौलिक अधिकारों के प्रतिबंध की
व्यवस्था करता है।
- अनुच्छेद 35 संसद को मौलिक अधिकारों से संबंधित विधि बनाने का अधिकार
देता है।
- मौलिक अधिकार न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (न्यायोचित) हैं।
- मौलिक अधिकारों में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का प्रावधान निहित
है।
- अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च
न्यायालय में रिट दायर की जा
सकती है।
- जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) में गोपनीयता का अधिकार
अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक
अधिकार माना गया।
- गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967) में मौलिक अधिकार बनाम नीति निदेशक तत्व
विवाद प्रारंभ हुआ।
- केसवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में मौलिक संरचना सिद्धांत
प्रतिपादित हुआ।
- मिनर्वा मिल्स केस (1980) में मौलिक अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों में
संतुलन की पुष्टि की गई।
- 44वें संशोधन (1978) द्वारा संपत्ति का अधिकार हटाया गया और अनुच्छेद
300A जोड़ा गया।
- नीति निदेशक तत्व संविधान के भाग IV में हैं।
- नीति निदेशक तत्व अनुच्छेद 36 से 51 तक वर्णित हैं।
- अनुच्छेद 36 नीति निदेशक तत्वों की परिभाषा देता है।
- अनुच्छेद 37 इन्हें न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं बनाता, परंतु राज्य
पर इन्हें लागू करने का
दायित्व डालता है।
- अनुच्छेद 38 सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय को बढ़ावा देता है।
- अनुच्छेद 38(2) आय, सुविधाओं और अवसरों की असमानताओं को कम करने का
लक्ष्य रखता है।
- अनुच्छेद 39 में नीति निर्देश हैं जिनमें समान कार्य के लिए समान वेतन
(39(d)) और धन के संकेंद्रण
की रोक (39(c)) शामिल हैं।
- अनुच्छेद 39A निःशुल्क विधिक सहायता का प्रावधान करता है।
- अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के संगठन का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 41 कार्य, शिक्षा और लोक सहायता पाने के अधिकार का उल्लेख करता
है।
- अनुच्छेद 42 काम की न्यायसंगत दशाएँ और प्रसूति सहायता का प्रावधान करता
है।
- अनुच्छेद 43 कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी और कल्याणकारी कार्यों का
निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता लागू करने का लक्ष्य रखता है।
- अनुच्छेद 45 छह वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक देखभाल और
शिक्षा का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 46 अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य दुर्बल वर्गों के हितों
की रक्षा का निर्देश देता
है।
- अनुच्छेद 47 पोषण स्तर, जीवन स्तर और लोक स्वास्थ्य सुधार का निर्देश
देता है।
- अनुच्छेद 48 कृषि और पशुपालन को आधुनिक वैज्ञानिक ढंग से संगठित करने का
निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 48A पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव रक्षा का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 49 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के संरक्षण का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 50 कार्यपालिका से न्यायपालिका के पृथक्करण का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 51 अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश
देता है।
- नीति निदेशक तत्व आयरिश संविधान से प्रेरित हैं।
- नीति निदेशक तत्व गैर-प्रवर्तनीय (गैर-न्यायोचित) हैं।
- मौलिक कर्तव्य संविधान के भाग IV-A में अनुच्छेद 51A में वर्णित हैं।
- मौलिक कर्तव्य 42वें संशोधन (1976) द्वारा जोड़े गए।
- वर्तमान में मौलिक कर्तव्यों की संख्या 11 है।
- मौलिक कर्तव्य स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर जोड़े गए।
- अनुच्छेद 51A(a) में संविधान, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करने
का कर्तव्य है।
- अनुच्छेद 51A(b) में स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का पालन करने का
कर्तव्य है।
- अनुच्छेद 51A(c) में देश की रक्षा करना और राष्ट्र की सेवा करना शामिल
है।
- अनुच्छेद 51A(d) में सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना है।
- अनुच्छेद 51A(e) में साम्प्रदायिक सद्भाव और भाईचारे की भावना का विकास
करना है।
- अनुच्छेद 51A(f) में देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करना है।
- अनुच्छेद 51A(g) में पर्यावरण, वन, झीलों, नदियों और जीव-जंतुओं की रक्षा
और संवर्धन का कर्तव्य है।
- अनुच्छेद 51A(h) में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और सुधार की भावना का
विकास करना है।
- अनुच्छेद 51A(i) में हिंसा से दूर रहना और समरसता को बढ़ाना है।
- अनुच्छेद 51A(j) में व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों में उत्कृष्टता के
लिए प्रयास करना है।
- अनुच्छेद 51A(k) में 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान
करने का कर्तव्य है।
- मौलिक कर्तव्य गैर-प्रवर्तनीय (गैर-न्यायोचित) हैं।